Jamshedpur News: जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेर परिसर में चार दिनों से चल रहा ज्ञान और साहित्य का उत्सव बुधवार को गरिमामयी समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ। समय इंडिया ट्रस्ट, नई दिल्ली और प्रज्ञा रिसर्च एसोसिएशन (प्राण), रांची के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस मेले ने लौहनगरी के पाठकों को एक मंच पर लाने का सफल प्रयास किया। 13 मई को समापन समारोह में न केवल पुस्तकों की दुनिया को सराहा गया, बल्कि भविष्य के लेखकों और साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कारों का वितरण भी किया गया।




डिजिटल युग में भी अटूट है पुस्तकों का आकर्षण
समापन समारोह के मुख्य वक्ता, समय इंडिया के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने अपने संबोधन में पुस्तकों की कालातीत प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल सूचना का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे व्यक्ति के जीवन को एक स्पष्ट दिशा और नई दृष्टि प्रदान करती हैं। आज के डिजिटल दौर में, जहाँ सूचनाओं की बाढ़ है, पुस्तकें हमें गहराई से सोचने और समझने का अवसर देती हैं। चंद्र भूषण ने युवाओं और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे मोबाइल और स्क्रीन से इतर पठन-पाठन की आदत विकसित करें, क्योंकि यही उनके चरित्र निर्माण का आधार है।


दिशोम जाहेर में उमड़ी साहित्य प्रेमियों की भीड़
चार दिनों तक चले इस मेले में जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों से साहित्य प्रेमियों, शोधकर्ताओं, युवाओं और विशेषकर स्कूली बच्चों की भारी भीड़ देखी गई। सजे-धजे स्टॉल्स पर न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें, बल्कि धर्म, इतिहास, दर्शन और विश्व प्रसिद्ध उपन्यासों का भंडार उपलब्ध था। आयोजकों ने पाया कि लोगों में विशेषकर झारखंड की संस्कृति, जनजातीय इतिहास और क्षेत्रीय साहित्य के प्रति जबरदस्त उत्सुकता रही। यह मेला केवल एक बाजार नहीं, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का एक जीवंत माध्यम साबित हुआ।

रचनात्मक प्रतियोगिताओं ने बच्चों में भरा जोश
पुस्तक मेले के दौरान बच्चों और युवाओं की रचनात्मकता को निखारने के लिए कई गतिविधियों का आयोजन किया गया था। समापन के अवसर पर चित्रकला, कविता पाठ और कहानी लेखन जैसी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, प्रेरक पुस्तकें और आकर्षक उपहार प्रदान किए गए। आयोजन समिति ने कहा कि इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य नई पीढ़ी को साहित्य के करीब लाना और उनकी कल्पनाशीलता को मंच प्रदान करना है। बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने पूरे परिसर को ऊर्जा से भर दिया।


जमशेदपुर के पाठकों का मिला अभूतपूर्व समर्थन
आयोजकों के अनुसार, जमशेदपुर के पुस्तक प्रेमियों से मिला समर्थन उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक था। चार दिनों में हजारों की संख्या में पुस्तकों की बिक्री यह दर्शाती है कि पाठकों के दिलों में किताबों की जगह आज भी सुरक्षित है। मेले के दौरान आयोजित साहित्यिक विमर्श और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने इसे एक उत्सव का रूप दे दिया। लोगों ने भारी मात्रा में किताबें खरीदकर यह संदेश दिया कि यदि सही मंच और अवसर मिले, तो समाज आज भी ज्ञान के अर्जन के प्रति पूरी तरह सजग है।

अब गुमला की ओर किताबों का काफिला
जमशेदपुर में मिली अपार सफलता के बाद अब यह साहित्यिक काफिला अपने अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान कर चुका है। आयोजकों ने घोषणा की है कि जमशेदपुर के बाद अब गुमला में ज्ञान की सरिता बहेगी। आगामी 15 से 18 मई तक गुमला के टाउन हॉल में पुस्तक मेले का आयोजन किया जाएगा। गुमला के पाठकों के लिए भी हजारों नई और दुर्लभ पुस्तकें उपलब्ध होंगी। जमशेदपुर की यादों को समेटे हुए यह आयोजन अब झारखंड के अन्य क्षेत्रों में साहित्यिक जागरूकता फैलाने के अपने मिशन को आगे बढ़ाएगा।