Jamshedpur news : जमशेदपुर प्रखंड के जसकनडीह गांव में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के तहत एक महत्वपूर्ण ग्रामसभा का आयोजन किया गया। मुंडा जॉनी देवगम की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में ग्रामीणों ने अपनी भाषायी, सांस्कृतिक और विशेषकर संवैधानिक अधिकारों को लेकर गहरी चर्चा की। इस ग्रामसभा का मुख्य उद्देश्य पेसा (PESA) नियमावली-2026 के प्रावधानों को धरातल पर उतारना और गांव के विकास व स्वशासन को नई दिशा देना रहा। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर यह साबित किया कि अब ग्रामीण अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग हैं।




ग्राम निधि के लिए बैंक खाता और कार्यालय संचालन पर निर्णय
ग्रामसभा के दौरान झारखंड पंचायत विभाग द्वारा जारी पत्रांक संख्या 803 एवं 804 पर गहन विचार-विमर्श किया गया। पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह निर्णय लिया गया कि गांव की अपनी 'ग्राम निधि' का प्रबंधन व्यवस्थित किया जाएगा। इसके लिए किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में अविलंब खाता खोला जाएगा। खाते के पारदर्शी संचालन के लिए ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया। साथ ही, पत्रांक 804 के आलोक में ग्रामसभा के कार्यों के सुचारू निष्पादन हेतु गांव के ही किसी सरकारी भवन को प्राथमिकता देते हुए कार्यालय स्थापित करने पर सहमति बनी।


अगली संयुक्त बैठक में एक-तिहाई उपस्थिति पर जोर
प्रशासनिक और सामाजिक कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामसभा ने अगली बैठक का खाका भी तैयार किया। आगामी बैठक जसकनडीह और तुपुडांग में संयुक्त रूप से आयोजित की जाएगी। पंचायत विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि बैठक में कुल सदस्यों की एक-तिहाई (1/3) उपस्थिति अनिवार्य होगी, ताकि लिए गए निर्णय संवैधानिक रूप से मान्य हों। इस प्रावधान का उद्देश्य सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा देना और ग्रामसभा की शक्तियों को नियमानुसार सुदृढ़ करना है।

1964 के सर्वे पर उठे सवाल, रैयती ने ग्रामसभा में रखी अपनी बात
ग्रामसभा का दूसरा सबसे संवेदनशील मुद्दा भूमि विवाद और अवैध हस्तांतरण का रहा। चर्चा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि 1932 के सर्वे सेटलमेंट में जो भूमि मुकुंद भूमिज (आदिवासी) के नाम दर्ज थी, वह 1964 के सर्वे में रहस्यमय तरीके से किसी गैर-आदिवासी के नाम पर रिकॉर्ड हो गई। ग्रामीणों ने इसे सीएनटी एक्ट 1908 का खुला उल्लंघन बताया। नियमानुसार, किसी भी आदिवासी की भूमि बिना उपायुक्त की अनुमति के गैर-आदिवासी को हस्तांतरित नहीं की जा सकती। इस गड़बड़ी ने गांव के रैयतों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है।


रैयती ने पेसा की धारा के तहत याचिका दायर की
इस भूमि विवाद के समाधान के लिए मुकुंद भूमिज के पोते नंदलाल सरदार ने एक साहसिक कदम उठाया है। उन्होंने पेसा नियमावली-2026 की विशेष धाराओं के तहत ग्रामसभा के समक्ष अपनी याचिका दायर की है। नंदलाल का तर्क है कि उनकी पुश्तैनी जमीन का हस्तांतरण अवैध है और उसे वापस मूल रैयत के वारिसों को मिलना चाहिए। ग्रामसभा ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लिया है कि बहुत जल्द दोनों पक्षों को आधिकारिक नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद ग्रामसभा स्वयं इस मुकदमे की सुनवाई करेगी और न्यायसंगत फैसला सुनाएगी। इस पहल से ग्रामीणों में यह विश्वास जगा है कि पेसा कानून के माध्यम से वे अपनी छीनी हुई जमीन वापस पा सकते हैं।