Jamshedpur: भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर 24 मई को दिल्ली के लाल किले में विशाल जनजाति सांस्कृतिक समागम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का आह्वान जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा किया गया है। आयोजन में देशभर की 500 से अधिक जनजातियों के करीब डेढ़ लाख प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। मंच के कोल्हान प्रभारी सुरा बिरुली ने इसकी जानकारी दी।


झारखंड से 5 हजार प्रतिनिधि होंगे शामिल
सुरा बिरुली ने बताया कि इस सांस्कृतिक समागम में झारखंड की 27 जनजातीय समुदायों से करीब 5 हजार महिला-पुरुष, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता भाग लेंगे। सभी प्रतिनिधि पारंपरिक वेशभूषा और जनजातीय वाद्ययंत्रों के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम को जनजातीय संस्कृति, परंपरा और पहचान के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

22 मई को रवाना होंगी तीन स्पेशल ट्रेनें
समागम में शामिल होने के लिए 22 मई को झारखंड से तीन स्पेशल ट्रेनें दिल्ली के लिए रवाना होंगी। ये ट्रेनें जमशेदपुर, रांची और दुमका से चलेंगी। मंच के अनुसार, बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग इन ट्रेनों से दिल्ली पहुंचेंगे। आयोजन समिति ने यात्रा और आवास की तैयारी भी शुरू कर दी है।

दिल्ली में निकलेगी भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा
कार्यक्रम के दौरान दिल्ली में पांच अलग-अलग स्थानों से भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे जनजातीय समाज के लोग पारंपरिक नृत्य, गीत और वाद्ययंत्रों के साथ शामिल होंगे। यह शोभायात्रा लाल किले तक पहुंचेगी, जहां विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह समागम जनजातीय अस्मिता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनेगा।

डीलिस्टिंग की मांग को लेकर होगी गर्जना रैली
जनजाति सुरक्षा मंच ने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान “डीलिस्टिंग” की मांग को लेकर जनजाति गर्जना रैली भी आयोजित की जाएगी। मंच का कहना है कि वर्तमान में अनुसूचित जाति समुदाय के लिए संविधान में यह प्रावधान है कि धर्म परिवर्तन करने पर उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, लेकिन अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए अनुच्छेद 342 में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर मंच लंबे समय से आवाज उठा रहा है।

रूढ़ि-परंपरा छोड़ने वालों को न मिले एसटी लाभ
सुरा बिरुली ने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय को संविधान में उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, रीति-रिवाज, परंपरा, आस्था और सामाजिक जीवनशैली के आधार पर आरक्षण का लाभ दिया गया है। उनका आरोप है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी कई लोग अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी मूल जनजातीय परंपरा और संस्कृति छोड़ चुके हैं, उन्हें एसटी समुदाय के लाभ से बाहर किया जाना चाहिए।

मंच ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें
जनजाति सुरक्षा मंच ने केंद्र सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें प्रलोभन देकर कराए जा रहे धर्मांतरण पर रोक लगाने, धर्मांतरित जनजातीय लोगों के नाम एसटी सूची से हटाने, धर्मांतरित व्यक्तियों को एसटी प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने से रोकने तथा सरकारी नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में एसटी आरक्षण का लाभ नहीं देने की मांग शामिल है। मंच का कहना है कि जनजातीय धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए यह कदम जरूरी है।