Jamshedpur News : जमशेदपुर के निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव की एक नई बयार बह रही है। जहाँ कल तक युवतियां केवल घर के कामकाज तक सीमित थीं, आज वे आधुनिक शिक्षण विधियों से लैस होकर समाज को गढ़ने के लिए तैयार हो रही हैं। जमशेदपुर विमेंस क्लब और अक्षर इंटरनेशनल स्कूल की ओर से सीएसआर (CSR) के तहत आयोजित तीन दिवसीय नर्सरी टीचर ट्रेनिंग कार्यशाला ने केरूआडूंगरी पंचायत की 43 युवतियों के जीवन में आशा की एक नई किरण जगाई है। यह पहल न केवल शिक्षा के स्तर को सुधारेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को भी सशक्त करेगी।




कौशल विकास से सशक्तिकरण: एक अनूठी पहल

इस कार्यशाला का आयोजन महज एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को तराशने का एक गंभीर प्रयास था। तीन दिनों तक चले इस सघन प्रशिक्षण में युवतियों को छोटे बच्चों को पढ़ाने की आधुनिक तकनीक, बाल मनोविज्ञान और कक्षा प्रबंधन के गुर सिखाए गए। अक्षर इंटरनेशनल स्कूल के प्रांगण में आयोजित इस शिविर ने इन युवतियों को यह विश्वास दिलाया कि वे भी एक पेशेवर शिक्षक बनकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं।

दूरदर्शी नेतृत्व: मुखिया कान्हू मुर्मू का सकारात्मक प्रयास

इस पूरी योजना के पीछे केरूआडूंगरी पंचायत के मुखिया और पूर्वी सिंहभूम जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष कान्हू मुर्मू की दूरगामी सोच रही है। उन्होंने यह महसूस किया कि पंचायत की युवतियों में क्षमता की कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण की आवश्यकता है। उनके विशेष आग्रह पर ही जमशेदपुर विमेंस क्लब ने इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी। एक जन प्रतिनिधि द्वारा अपनी पंचायत की बेटियों के करियर के लिए इस तरह का प्रयास करना समाज के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है।

विशेषज्ञ मार्गदर्शन: अनुभव और जोश का संगम

प्रशिक्षण के दौरान जमशेदपुर विमेंस क्लब की अध्यक्ष रीना वेदागिरी और सचिव पूजा भालोठिया ने युवतियों का उत्साहवर्धन किया। वहीं, अक्षर इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक करमबीर सोनी और सचिव श्वेता सोनी ने अपनी देखरेख में विशेषज्ञों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित किया। युवतियों को बताया गया कि एक नर्सरी टीचर की भूमिका बच्चे के भविष्य की नींव रखने जैसी होती है। इस दौरान खेल-खेल में शिक्षा देने के रचनात्मक तरीकों पर विशेष जोर दिया गया।

प्रमाण पत्र वितरण: स्वावलंबन की ओर पहला कदम

शनिवार को कार्यशाला के समापन पर एक गरिमामयी समारोह आयोजित किया गया। मुखिया कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में सभी 43 सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रमाण पत्र प्राप्त करते समय युवतियों के चेहरों पर जो आत्मविश्वास और मुस्कान थी, वह इस कार्यक्रम की सफलता की सबसे बड़ी गवाही दे रही थी। अब ये युवतियां न केवल अपने गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकेंगी, बल्कि निजी स्कूलों में रोजगार पाने या स्वयं का छोटा केंद्र शुरू करने के लिए भी सक्षम हो गई हैं।

सामुदायिक एकजुटता और सुखद भविष्य की नींव

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में गुरुशरण सिंह, वार्ड सदस्य पानोसोती मार्डी, टीएसएफ फेलो सिदलाल टुडू, प्रियंका गुड़िया और कौशल्या टुडू जैसे जागरूक नागरिकों की उपस्थिति ने इसे एक सामुदायिक उत्सव का रूप दे दिया। जमशेदपुर विमेंस क्लब की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही संसाधन और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण युवतियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। यह सकारात्मक कहानी आने वाले समय में जिले की अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।