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Jamshedpur News:अपनी पीठ में लोहे की कील घोंप कर श्रद्धालुओं ने दिखाई शिव के प्रति अटूट आस्था

Jamshedpur News: परसुडीह क्षेत्र स्थित तुपुडांग गांव में बुधवार को आयोजित चड़क मेले में श्रद्धा और भक्ति का अनोखा नजारा देखने को मिला। श्री श्री चड़क पूजा कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस मेले में सैकड़ों श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचे। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और आस्था का संगम देखने को मिला। भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करने के लिए भक्तों ने कठिन और रोमांचकारी अनुष्ठानों में भाग लिया, जिसने हर किसी को आश्चर्यचकित कर दिया।

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144 साल पुरानी ‘रजनी फोड़ा’ परंपरा का निर्वहन

इस मेले की सबसे प्रमुख आकर्षण 144 वर्षों से चली आ रही ‘रजनी फोड़ा’ परंपरा रही। इस परंपरा के तहत भक्त अपनी पीठ में लोहे की नुकीली कीलें (हुक) चुभवाते हैं। इसके बाद उन्हें गमछे के सहारे करीब 50 फीट ऊंचे लकड़ी के खंभे से बांधकर हवा में लटकाया जाता है। भक्त इस स्थिति में खंभे के चारों ओर तीन चक्कर लगाते हुए नृत्य करते हैं। यह दृश्य बेहद रोमांचकारी और रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।

मिथुन लोहार और महेश लोहार ने निभाई परंपरा

इस वर्ष मिथुन लोहार और महेश लोहार ने अपनी पीठ में लोहे की कील घोंप कर इस परंपरा का निर्वहन किया। उन्होंने बताया कि यह कार्य पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है। कील चुभाने के दौरान थोड़ी पीड़ा जरूर होती है, लेकिन उसके बाद किसी प्रकार की परेशानी महसूस नहीं होती। उनके अनुसार, यह सब भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद से संभव हो पाता है। वर्षों से इस परंपरा को निभाते हुए वे खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं।

बिना दवा के भर जाते हैं घाव

महेश लोहार ने बताया कि वे पिछले 14 वर्षों से इस अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी उन्होंने अपनी पीठ में कील लगवाई। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के बाद वे किसी प्रकार की दवा का उपयोग नहीं करते। केवल पूजा में उपयोग किए गए सिंदूर को घाव पर लगाया जाता है। उनका दावा है कि 10 से 12 दिनों के भीतर घाव पूरी तरह ठीक हो जाता है। अब तक उन्हें किसी प्रकार की गंभीर समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है, जिसे वे भगवान शिव की कृपा मानते हैं।


श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, मन्नतों की लंबी कतार

चड़क मेले में कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालुओं ने पास के तालाब में स्नान कर भगवान शिव की पूजा की। कई भक्त तपती दोपहर में जमीन पर लोटते हुए मंदिर पहुंचे और अपनी आस्था प्रकट की। सभी ने मंदिर की परिक्रमा कर अपने परिवार के सुख-समृद्धि और कुशल जीवन के लिए प्रार्थना की।

वर्षों पुरानी मान्यता और लोगों का अटूट विश्वास

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि इस मेले से जुड़ी मान्यता है कि यहां भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने से हर मनोकामना पूरी होती है। इसी विश्वास के साथ लोग हर साल यहां आते हैं। उन्होंने स्वयं पिछले 16-17 वर्षों से लगातार इस मेले में शामिल होकर पूजा-अर्चना की है। आयोजन समिति के भीमसेन भूमिज, सूरज महतो सहित अन्य सदस्यों ने भी मेले को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तुपुडांग का यह चड़क मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का जीवंत उदाहरण है, जो पीढ़ियों से लोगों को जोड़ता आ रहा है।

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