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Assam election: हेमंत सोरेन असम को जितने के लिए कर रहे कड़ी मशक्कत

Assam election: Hemant Soren ने असम के बोरचल्ला, रोगोनाडी और दुलियाजान विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित चुनावी सभाओं में जोरदार उपस्थिति दर्ज करायी। अपने संबोधन में उन्होंने साफ कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का असम में आना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सामाजिक-राजनीतिक पहल है। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य सिर्फ चुनाव जीतना नहीं, बल्कि उन वर्गों को आवाज देना है, जिन्हें लंबे समय से हाशिए पर रखा गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि झामुमो की विचारधारा आदिवासी, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि असम में भी इन वर्गों को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प की जरूरत है, जो उनके हक और सम्मान की लड़ाई को आगे बढ़ा सके।

“हक और सम्मान की लड़ाई के लिए राजनीतिक ताकत जरूरी”

अपने भाषण के दौरान Hemant Soren ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि अधिकारों की लड़ाई केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत से जीती जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के वंचित वर्ग राजनीतिक रूप से संगठित और मजबूत नहीं होंगे, तब तक उनकी आवाज सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुंचेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने वोट की ताकत को पहचानें और ऐसे प्रतिनिधियों को चुनें, जो वास्तव में उनके मुद्दों को उठाते हों। उनके अनुसार, लोकतंत्र में बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम चुनाव है, और यही अवसर है जब जनता अपने भविष्य की दिशा तय कर सकती है।

डबल इंजन सरकार पर आरोप और सामाजिक विभाजन का मुद्दा

मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ “डबल इंजन” सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार समाज को एकजुट करने के बजाय बांटने की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि लोगों को धर्म, जाति और क्षेत्र के आधार पर विभाजित किया जा रहा है, ताकि सत्ता में बने रहना आसान हो सके। Hemant Soren ने कहा कि झामुमो हमेशा से एकता और भाईचारे की राजनीति करता आया है और आगे भी यही उसका रास्ता रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस विभाजनकारी राजनीति को समझें और उसके खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों।

आदिवासियों ने असम को पहचान दिलायी, मगर फिर भी हैं उपेक्षित 

असम की अर्थव्यवस्था में चाय उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन इसी उद्योग से जुड़े मजदूरों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। Hemant Soren ने कहा कि जिन हाथों ने असम को पहचान दिलायी, वही आज सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं। उन्होंने बताया कि चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों को बहुत कम मजदूरी मिलती है, जिससे उनका जीवन स्तर सुधार नहीं पा रहा है। कई गांवों में अब भी बुनियादी सुविधाओं—जैसे बिजली, स्वच्छ पेयजल और पक्के मकान—का अभाव है। मुख्यमंत्री ने इसे एक बड़ी विडंबना बताते हुए कहा कि विकास के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जनता झामुमो को समर्थन देती है, तो इन मुद्दों को प्राथमिकता के साथ हल किया जाएगा।

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असम की जनता अब बदलाव चाहते हैं : कल्पना सोरेन 

इसी कड़ी में विधायक Kalpana Soren ने भी असम के सोनारी और टिंगखोंग विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया। उन्होंने कहा कि जनता का उत्साह इस बात का संकेत है कि अब असम बदलाव के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि सोच और व्यवस्था में बदलाव का चुनाव है। जनता अब अधिकार, सम्मान, शिक्षा और रोजगार जैसे मूल मुद्दों पर सरकार चाहती है। Kalpana Soren ने विश्वास जताया कि इस बार असम में एक ऐसी सरकार बनेगी, जो हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए काम करेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस बदलाव की मुहिम का हिस्सा बनें और अपने भविष्य को खुद तय करें।

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