विधायक जयराम महतो का पुतला दहन, सुंडी जाति को SC श्रेणी में शामिल करने के प्रस्ताव का तीखा विरोध

झारखंड की उपराजधानी दुमका में आरक्षण की श्रेणियों में बदलाव के प्रस्ताव को लेकर सामाजिक और राजनीतिक पारा चढ़ गया है। मंगलवार को शहर के हृदय स्थली कहे जाने वाले एसपी कॉलेज चौक पर छात्र-छात्राओं और अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के लोगों ने डुमरी विधायक जयराम महतो के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विधायक पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उनका पुतला फूंका और जमकर नारेबाजी की।


विवाद की जड़: सुंडी जाति को SC में शामिल करने की मांग

विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण विधायक जयराम महतो द्वारा सुंडी (सूड़ी) जाति को अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में शामिल करने के संबंध में दिया गया हालिया बयान और प्रस्ताव है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इस प्रकार का कोई भी कदम वर्तमान में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आने वाली जातियों के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण के लाभ पर सीधा प्रहार होगा।

प्रदर्शन में शामिल छात्र नेताओं ने कहा कि अनुसूचित जाति पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई है और सीमित संसाधनों व अवसरों के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे में एक नई जाति को इस श्रेणी में जोड़ने से उपलब्ध आरक्षण का दायरा और छोटा हो जाएगा, जिससे मूल एससी समुदाय के युवाओं के भविष्य पर संकट मंडराने लगेगा।

सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान पर तर्क

आंदोलनकारियों ने केवल आर्थिक आधार पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आधार पर भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि अनुसूचित जाति समुदाय की अपनी एक विशिष्ट पहचान और परंपरा रही है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के विचारों और उनकी तस्वीरों को इस समुदाय के हर घर में सम्मान मिलता है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिस समाज को जोड़ने की बात की जा रही है, उनकी सामाजिक संरचना और रीति-रिवाज एससी समुदाय से मेल नहीं खाते।

जातीय सर्वेक्षण और आयोग के गठन की मांग

प्रदर्शनकारियों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों को नसीहत देते हुए कहा कि किसी भी जाति को किसी विशेष श्रेणी में शामिल करने से पहले उसकी जमीनी हकीकत, सामाजिक स्थिति और आर्थिक पिछड़ेपन का विस्तृत और वैज्ञानिक सर्वेक्षण अनिवार्य है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि झारखंड में जल्द से जल्द 'एससी आयोग' का गठन किया जाए ताकि इस वर्ग की समस्याओं का समाधान संवैधानिक तरीके से हो सके। इसके साथ ही शिक्षा और सरकारी नौकरियों में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की भी आवाज उठाई गई।

राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

सभा के अंत में छात्र समन्वय समिति और सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी एकतरफा निर्णय लिया गया या मौजूदा आरक्षण के साथ छेड़छाड़ की कोशिश हुई, तो यह विरोध केवल दुमका तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में इसे राज्यव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा। फिलहाल, इस घटना के बाद क्षेत्र में वैचारिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है, जो आने वाले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।

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