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Jamshedpur News : जमशेदपुर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी समीक्षा: उपायुक्त का सख्त निर्देश, लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई

Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम जिले के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षात्मक बैठक प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी और सुलभ तरीके से पहुँचाना था। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों (MOIC) को निर्देश दिया कि वे उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम और बेहतर इस्तेमाल करें। बैठक में 'प्रोजेक्ट उल्लास' से लेकर मातृ-शिशु मृत्यु दर, कुपोषण और लिंगानुपात जैसे गंभीर विषयों पर बिंदुवार चर्चा की गई। प्रशासन का लक्ष्य जिले की स्वास्थ्य रैंकिंग को सुधारना और बुनियादी ढांचे को इतना मजबूत बनाना है कि आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को शहर भागने की जरूरत न पड़े।



घाटशिला में नवजात बच्चों की मौत पर चिंता और जांच के आदेश

बैठक के दौरान सबसे संवेदनशील मुद्दा घाटशिला अस्पताल के 'शिशु केयर यूनिट' (SNCU) से सामने आया। पिछले एक वर्ष में यहाँ 11 नवजात बच्चों की मौत की सूचना को उपायुक्त ने अत्यंत चिंताजनक बताया। उन्होंने सिविल सर्जन और संबंधित एमओआईसी को निर्देश दिया कि इन मौतों के मूल कारणों की गहन समीक्षा की जाए। डीसी ने कहा कि केवल आंकड़ों को देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवस्था की उन खामियों को दूर करना होगा जिनकी वजह से मासूमों की जान जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी खराबी हो या मानवीय भूल, जवाबदेही तय कर व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

पटमदा और घाटशिला में अवैध केंद्रों पर होगी सर्जिकल स्ट्राइक

जिले में लिंगानुपात के आंकड़ों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। विशेष रूप से पटमदा (864) और घाटशिला (867) में राज्य के औसत से कम लिंगानुपात दर्ज किया गया है। उपायुक्त ने इस पर प्रसव पूर्व लिंग जांच की आशंका जताई है। उन्होंने जिले के सभी एसडीओ (SDO) के माध्यम से अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटरों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सघन छापेमारी और कठोर कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया है। पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए प्रशासन अब इन क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखेगा।

कुपोषण उपचार केंद्रों (MTC) की खाली सीटें और समन्वय की कमी

बहरागोड़ा, घाटशिला, मुसाबनी, पोटका और टेल्को स्थित कुपोषण उपचार केंद्रों (MTC) में जनवरी और फरवरी माह के दौरान बेड ऑक्यूपेंसी (बिस्तरों की संख्या) में गिरावट देखी गई। इस पर नाराजगी जताते हुए उपायुक्त ने केंद्र प्रभारियों को प्रशिक्षित और संवेदनशील स्टाफ की तैनाती करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि महिला एवं बाल विकास विभाग की सेविकाओं और सहियाओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। कुपोषित बच्चों के अभिभावकों की सही तरीके से काउंसलिंग की जाए ताकि वे अपने बच्चों को एमटीसी में भर्ती कराने के लाभ को समझ सकें और कोई भी बच्चा कुपोषण की जंग न हारे।


प्रोजेक्ट 'उल्लास' और डायलिसिस सेवाओं की निरंतरता

मिर्गी रोगियों की पहचान और उनके समुचित इलाज के लिए जिले में चलाए जा रहे 'प्रोजेक्ट उल्लास' की समीक्षा करते हुए डीसी ने नियमित कैंप लगाने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, सदर अस्पताल और घाटशिला अस्पताल में संचालित डायलिसिस इकाइयों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने सख्त निर्देश दिया कि डायलिसिस की सुविधा किसी भी स्थिति में ठप नहीं होनी चाहिए। मेंटेनेंस और सर्विसिंग के समय को न्यूनतम रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि मरीजों को बिना किसी बाधा के जीवन रक्षक सेवाएं मिलती रहें।

संस्थागत प्रसव और 'ममता वाहन' की सुलभता पर जोर

जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव (अस्पताल में जन्म) सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बोड़ाम और डुमरिया क्षेत्र में 63 प्रसव घरों में होने के मामले सामने आए हैं। उपायुक्त ने इन मामलों की 'केस स्टडी' करने का निर्देश दिया है ताकि यह समझा जा सके कि महिलाएं अस्पताल क्यों नहीं पहुँच पा रही हैं। गुड़ाबांदा के बनमाकड़ी पंचायत सहित प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक ममता वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों से समन्वय करने का निर्देश दिया गया है।

टीकाकरण और मौसमी बीमारियों के खिलाफ महाअभियान

टीकाकरण के लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त करने के लिए डीसी ने स्वास्थ्यकर्मियों को घर-घर जाकर सत्यापन करने का निर्देश दिया है। जुगसलाई जैसे क्षेत्रों में जहाँ टीकाकरण की प्रगति धीमी है, वहां विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इसके साथ ही, गर्मी और मानसून के दस्तक देने से पहले डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए फॉगिंग, जागरूकता अभियान और नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम की गतिविधियों की निगरानी तेज करने का आदेश दिया गया है। स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपस्थिति को अनिवार्य बनाया गया है।

एनीमिया मुक्त भारत और उदासीन कर्मियों पर गाज

बैठक के अंत में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन, टीबी उन्मूलन और एनीमिया मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में एनीमिया जांच के दायरे को बढ़ाने और गैर-संचारी रोगों (NCD) की स्क्रीनिंग को सशक्त बनाने को कहा। सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी उन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए रही जो अपने कार्यों में उदासीनता बरत रहे हैं। डीसी कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि कार्य के प्रति लापरवाह कर्मियों की पहचान की जाए और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन का संदेश साफ है—बेहतर काम करने वालों को प्रोत्साहन और कामचोरी करने वालों पर कार्रवाई। 

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