Jamshedpur News : चाकुलिया प्रखंड में आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को संवैधानिक शक्ति के साथ जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। हाल ही में आयोजित एक विशाल बैठक में चाकुलिया क्षेत्र के लगभग 150 गांवों के माझी बाबा और सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। इस समागम का मुख्य उद्देश्य सदियों पुरानी माझी परगाना व्यवस्था को और अधिक संगठित करना और झारखंड में लागू पेसा (PESA) नियमावली के प्रति लोगों को जागरूक करना था। यह बैठक न केवल परंपराओं के संरक्षण का केंद्र बनी, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति को कानूनी रूप से सशक्त बनाने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुई।
150 गांवों के माझी बैठक में हुए शामिल
चाकुलिया प्रखंड में हुई यह बैठक आदिवासी समाज की एकजुटता का प्रतीक बनी। इसमें लगभग 150 गांवों के पारंपरिक ग्राम प्रधानों, जिन्हें 'माझी बाबा' कहा जाता है, ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन माझी बाबाओं के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिक भी शामिल हुए। बैठक का मुख्य स्वर यह था कि आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था ही उनकी असली पहचान है और इसे बचाए रखना तथा समय के अनुसार अपडेट करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
15 पीढ़ परगाना को पगड़ी पोशी किया गया
पारंपरिक सांगठनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करते हुए बैठक में 15 पीढ़ परगाना का विधिवत मनोनयन किया गया। मनोनयन के पश्चात पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इन सभी 15 परगाना बाबाओं की 'पगड़ी पोशी' की गई। आदिवासी समाज में पगड़ी पहनाना केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि न्याय, ईमानदारी और समाज के नेतृत्व की एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का प्रतीक है। उपस्थित जनसमूह ने हर्षोल्लास के साथ इस नई व्यवस्था का स्वागत किया और समाज के प्रति अपनी जवाबदेही दोहराई।
तोरोफ परगाना डॉ. अर्जुन टुडू को मिली विस्तार की जिम्मेदारी
संगठन के विस्तार की प्रक्रिया अभी जारी है। बैठक में यह जानकारी दी गई कि अभी चार और पीढ़ परगाना का चयन किया जाना शेष है। इन रिक्त पदों को भरने और उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करने का जिम्मा झारखंड पोनोत माझी परगाना व्यवस्था के तोरोफ परगाना डॉ. अर्जुन टुडू को सौंपा गया है। डॉ. टुडू की देखरेख में इन पदों पर नियुक्ति की जाएगी, ताकि पूरे प्रखंड की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था को सुचारू रूप से एक सूत्र में पिरोया जा सके।
माझी बाबाओं को दिया ग्राम सभा को सशक्त बनाने के बारे में बताया
बैठक का सबसे तकनीकी और महत्वपूर्ण सत्र पेसा (पचायत उपबंध - अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) नियमावली पर आधारित रहा। झारखंड स्तरीय प्रशिक्षक पंचानन सोरेन ने उपस्थित ग्रामीणों और माझी बाबाओं को पेसा कानून की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली किस प्रकार ग्राम सभा को सर्वोपरि अधिकार देती है। इसके तहत जल, जंगल, जमीन और स्थानीय संसाधनों पर समाज का मालिकाना हक सुनिश्चित करने के संवैधानिक प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।
पेसा कानून के सही क्रियान्वयन से ही गांव का वास्तविक विकास संभव
पारंपरिक स्वशासन सशक्तिकरण संस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा हांसदा और संस्थान के पेसा सलाहकार विजय कुजूर ने भी सत्र को संबोधित किया। विजय कुजूर ने जोर देकर कहा कि पेसा कानून के सही क्रियान्वयन से ही गांव का वास्तविक विकास संभव है। उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक किया कि कैसे वे ग्राम सभा के माध्यम से अपनी परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए सरकारी योजनाओं का बेहतर लाभ उठा सकते हैं। कृष्णा हांसदा ने आदिवासी समाज को संगठित होने और अपने अधिकारों के लिए संवैधानिक रास्ते अपनाने की अपील की।
समाज के युवाओं को पारंपरिक मूल्यों की शिक्षा दी
इस भव्य आयोजन में कोल्हान और आसपास के क्षेत्रों के कई प्रमुख पारंपरिक नेता शामिल हुए। इनमें तोरोप परगाना डॉ. अर्जुन टुडू, बहरागोड़ा के तोरोप परगाना शीलू मार्डी, और माझी बाबा मिहिराम सोरेन प्रमुख थे। इन वरिष्ठ पदाधिकारियों ने समाज के युवाओं को पारंपरिक मूल्यों की शिक्षा दी और बताया कि आधुनिक लोकतंत्र में अपनी पारंपरिक व्यवस्था को बचाए रखना क्यों आवश्यक है। विभिन्न गांवों से आए माझी बाबाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और सांगठनिक मजबूती पर सुझाव दिए।
समाज का निर्माण के लिए रोडमैप तैयार किया
बैठक के अंत में एक सामूहिक संकल्प लिया गया कि पेसा नियमावली के तहत समाज के लोगों को न केवल संगठित किया जाएगा, बल्कि उन्हें हर स्तर पर सशक्त बनाने का काम भी शुरू होगा। यह तय किया गया कि आने वाले समय में हर गांव में ग्राम सभाओं को अधिक सक्रिय बनाया जाएगा और युवाओं को पेसा कानून का प्रशिक्षण दिया जाएगा। चाकुलिया की यह बैठक आने वाले समय में झारखंड के अन्य प्रखंडों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगी, जहां परंपरा और आधुनिक कानून के संगम से समाज का विकास होगा।
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