आधुनिक शोरूम की तर्ज पर दो मंजिला संरचना का विकास
साकची जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में निर्मित यह 'हाट-पलाश मार्ट' किसी बड़े कॉर्पोरेट शोरूम से कम नहीं है। जिला प्रशासन ने इसे दो मंजिला आधुनिक संरचना के रूप में विकसित किया है, जहाँ लाइटिंग, डिस्प्ले और ग्राहकों के अनुभव का खास ख्याल रखा गया है। इस केंद्र को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यहाँ आने वाले शहरी ग्राहकों को ग्रामीण उत्पादों के प्रति एक प्रीमियम अनुभव मिल सके। दो तलों में विभाजित इस भवन में भूतल पर उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की व्यवस्था है, जबकि प्रथम तल पर खान-पान और विश्राम के लिए विशेष स्थान बनाया गया है।
स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा वैश्विक मंच
उद्घाटन के दौरान उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि इस हाट का प्राथमिक लक्ष्य बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना है। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों के कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को अपने बेहतरीन उत्पादों के लिए सही बाजार और उचित मूल्य नहीं मिल पाता। 'जमशेदपुर हाट' के माध्यम से अब इन छोटे उद्यमियों को सीधे ग्राहकों से मिलने और अपनी ब्रांडिंग करने का अवसर मिलेगा। उपायुक्त ने इसे 'लोकल फॉर वोकल' की दिशा में जिला प्रशासन का एक क्रांतिकारी कदम बताया, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा।
"जीवेदोक अभियान": आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
इस परियोजना को जिला प्रशासन के विशेष “जीवेदोक अभियान” के साथ जोड़ा गया है। इस अभियान का मूल मंत्र है- महिलाओं और युवाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र करना। 'पलाश मार्ट' इसी कड़ी का एक हिस्सा है, जहाँ झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ी सखी मंडलों की महिलाओं द्वारा तैयार शुद्ध और प्राकृतिक उत्पादों को रखा गया है। उद्घाटन कार्यक्रम में गुमला के बघिमा महिला विकास मंडल की दीदियों ने अपनी सफलता की कहानी साझा की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कैसे एक छोटा सा प्रयास बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव का कारण बन सकता है।
पलाश मार्ट: शुद्धता और परंपरा का अनूठा संगम
हाट के भूतल पर स्थित 'पलाश मार्ट' में उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। यहाँ विशेष रूप से झारखंड की पहचान बन चुकी 'पलाश' ब्रांड के उत्पाद जैसे- शुद्ध सरसों तेल, प्राकृतिक शहद, मसाले, और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य सामग्रियां उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए यहाँ सेनेटरी उत्पाद और दैनिक उपयोग की हस्तनिर्मित वस्तुएं भी रखी गई हैं। यहाँ मिलने वाले सभी उत्पाद रसायनों से मुक्त और पारंपरिक विधियों से तैयार किए गए हैं, जो गुणवत्ता के उच्च मानकों को पूरा करते हैं।
कला और संस्कृति का संरक्षण: पाईटकर और पारंपरिक वाद्ययंत्र
मार्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'सांस्कृतिक कोना' है। यहाँ झारखंड की प्राचीन 'पाईटकर पेंटिंग' और हस्तशिल्प के नमूनों को प्रमुखता दी गई है। इसके अलावा, ‘सेरांग’ सेक्शन संगीत प्रेमियों और कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहाँ बोड़ाम प्रखंड के अंधारझोर गांव के कारीगरों द्वारा बनाए गए पारंपरिक वाद्य यंत्र जैसे मांदर, ढोलक, नगाड़ा, तबला और डमरू बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इन दुर्लभ वाद्ययंत्रों को मुख्यधारा के बाजार में लाकर प्रशासन ने विलुप्त होती कलाओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है।
‘दीदी कैफे’: पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों का स्वाद
हाट के प्रथम तल पर संचालित ‘दीदी कैफे’ शहरवासियों के लिए आकर्षण का नया केंद्र होगा। इस कैफे की कमान सखी मंडल की महिलाओं के हाथ में है। यहाँ के मेनू में विशेष रूप से स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यहाँ 'स्टीम फूड' और पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दी गई है। यह कैफे न केवल महिलाओं को रोजगार देगा, बल्कि साकची आने वाले लोगों को बाजार के जंक फूड के मुकाबले एक स्वस्थ और घरेलू स्वाद वाला विकल्प भी प्रदान करेगा।
प्रशासनिक उपस्थिति और भविष्य की रूपरेखा
इस उद्घाटन समारोह में जिले के प्रमुख आला अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें उप विकास आयुक्त श्री नागेंद्र पासवान, धालभूम के अनुमंडल पदाधिकारी अर्णव मिश्रा, जेएनएसी के उप नगर आयुक्त कृष्णा कुमार, और जिला परिवहन पदाधिकारी धनंजय शामिल थे। जेएसएलपीएस के डीपीएम श्री सुजीत बारी ने संचालन की तकनीकी बारीकियों से अधिकारियों को अवगत कराया। प्रशासन की योजना भविष्य में इस तरह के केंद्रों को जिले के अन्य हिस्सों में भी विस्तारित करने की है, ताकि झारखंड की ग्रामीण प्रतिभा को एक संगठित बाजार मिल सके।
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