खेल के मैदान में आमतौर पर खिलाड़ियों को आधुनिक जर्सी और स्पोर्ट्स वियर में देखा जाता है, लेकिन शहर से सटे तालसा गांव के फुटबॉल मैदान में रविवार को एक ऐसा दृश्य दिखा जिसने न केवल सबका दिल जीत लिया, बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश भी दिया. यहां तीन दिवसीय बाहा पाता महोत्सव के अवसर पर आयोजित फुटबॉल प्रतियोगिता में आदिवासी महिलाओं ने पारंपरिक साड़ी पहनकर फुटबॉल को ऐसी किक मारी कि दर्शक दीर्घा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी. मैदान पर उतरी इन जांबाज महिलाओं ने साबित कर दिया कि पारंपरिक वेशभूषा उनकी रफ्तार की बाधा नहीं, बल्कि उनकी शक्ति है. साड़ी पहनकर पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान में दौड़ती और प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को मात देकर गोल दागती महिलाओं को देखना किसी सुखद अनुभव से कम नहीं था. इस अनोखी प्रतियोगिता ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी संस्कृति और परंपराओं को गौरव के साथ अपनाया जा सकता है. फुटबॉल किक प्रतियोगिता में 45 युवतियों रजिस्ट्रेशन कराया था. जिसमें परसुडीह क्षेत्र के जसकनडीह गांव की रहने वाली उपाल सामद ने बेहतरीन किक मारकर प्रथम पुरस्कार की विजेता बनीं. कोरसे काशीडीह की रायमत मुर्मू द्वितीय पुरस्कार पर कब्जा जमा. वहीं सुंदरनगर क्षेत्र के नांदुप निवासी रीना कुंकल ने तृतीय पुरस्कार की हकदार बनीं.कार्यक्रम को सफल बनाने में क्लब के सलाहकार सोमाय हांसदा, मुखिया कान्हू मुर्मू, वकील हेंब्रम, जितेन हेंब्रम, दारोगा हेंब्रम, भगीरथी मार्डी, मगत मार्डी, सुधीर बेसरा, साहेबराम मुर्मू, शिशू मुर्मू, सुरेश हेंब्रम, सनातन सोरेन, सनातन हेंब्रम और मानू हेंब्रम सहित अन्य सदस्यों ने योगदान दिया.
सांस्कृतिक संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण भीआयोजकों ने बताया कि इस आयोजन का मकसद महिलाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें अपनी आदिवासी विरासत से जोड़े रखना है. बाहा पाता के पावन अवसर पर इस खेल के माध्यम से समाज की महिलाओं के भीतर छिपी प्रतिभा को एक नया मंच मिला है. मौके पर मुख्य अतिथि माझी परगना महाल के देश पारानिक सह माझी बाबा दुर्गाचरण मुर्मू ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया. इस अनूठी प्रतियोगिता को देखने के लिए स्थानीय ग्रामीणों में जबरदस्त क्रेज दिखा. विशिष्ट अतिथि के रूप में केरूआडुंगरी के मुखिया कान्हू मुर्मू और मध्य घाघीडीह के मुखिया सुनील किस्कू ने भी खेल की सराहना की.
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