पोटका: झारखंड की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने जे-टेट 2026 में भूमिज भाषा को शामिल करने का निर्णय लिया है। इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय क्षेत्रीय विधायक संजीव सरदार के निरंतर प्रयासों को देते हुए, भूमिज समाज के सैकड़ों लोगों ने तुरामडीह स्थित उनके आवासीय कार्यालय पहुँचकर उनका भव्य स्वागत और अभिनंदन किया। ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक उल्लास के बीच समाज के लोगों ने अपनी इस जीत का जश्न मनाया।
तुरामडीह में उमड़ा जनसैलाब, ढोल-नगाड़ों से गूंजा परिसर
मंगलवार को पोटका के विभिन्न क्षेत्रों से भूमिज समाज के सैकड़ों लोगों का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल तुरामडीह स्थित विधायक संजीव सरदार के आवासीय कार्यालय पहुँचा। हाथों में मालाएं और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ पहुँचे ग्रामीणों और समाजसेवियों ने विधायक के समर्थन में नारे लगाए। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक को फूलों से लाद दिया और अंगवस्त्र भेंट कर उनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया। कार्यालय का पूरा परिसर उत्सव के माहौल में तब्दील हो गया, जहाँ हर चेहरा अपनी मातृभाषा को मिली नई पहचान से खिला हुआ था।
विधायक संजीव सरदार के अटूट संघर्ष को मिली सफलता
प्रेस वार्ता और अभिनंदन समारोह के दौरान समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि जे-टेट में भूमिज भाषा को शामिल कराना कोई आसान कार्य नहीं था। इसके लिए विधायक संजीव सरदार ने विधानसभा से लेकर शासन के गलियारों तक मजबूती से अपनी बात रखी। समाज के प्रतिनिधियों ने रेखांकित किया कि विधायक ने हमेशा समाज के अधिकार, सम्मान और भाषाई पहचान के लिए एक सजग प्रहरी की तरह कार्य किया है। उनके निरंतर पत्राचार और मुख्यमंत्री के साथ व्यक्तिगत वार्ताओं का ही सुखद परिणाम है कि आज भूमिज भाषा को राज्य की प्रतिष्ठित शिक्षक पात्रता परीक्षा में स्थान मिला है।
3. युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के नए द्वार खुले
इस निर्णय का सबसे व्यापक प्रभाव क्षेत्र के शिक्षित युवाओं पर पड़ने वाला है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि अब भूमिज समाज के अभ्यर्थी अपनी मातृभाषा में परीक्षा दे सकेंगे, जिससे उनके चयन की संभावना बढ़ जाएगी। इससे न केवल प्राथमिक शिक्षा में स्थानीय भाषा का समावेश होगा, बल्कि उन युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे जो अपनी संस्कृति और भाषा से गहराई से जुड़े हैं। यह कदम समाज के शैक्षणिक और व्यावसायिक उत्थान के लिए एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
हक और पहचान के लिए मेरा संघर्ष रहेगा जारी: विधायक
अपने भव्य अभिनंदन से अभिभूत विधायक संजीव सरदार ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यह जीत उनकी अकेले की नहीं, बल्कि पूरे भूमिज समाज के धैर्य और संघर्ष की जीत है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "समाज के अधिकार, सम्मान और पहचान की रक्षा करना मेरा प्राथमिक कर्तव्य है। भूमिज भाषा को जे-टेट में शामिल किया जाना शिक्षा के क्षेत्र में हमारे समाज को एक नई दिशा प्रदान करेगा।" उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि वे भविष्य में भी जल, जंगल, जमीन और अपनी भाषा-संस्कृति के संरक्षण के लिए सड़क से सदन तक आवाज उठाते रहेंगे।
शिक्षा और सामाजिक विकास पर विशेष जोर
विधायक ने आगे कहा कि किसी भी समाज की उन्नति उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है। जे-टेट में क्षेत्रीय भाषा के आने से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में अब भूमिज भाषी शिक्षक अपनी सेवाएं दे सकेंगे, जिससे बच्चों को समझने और सीखने में आसानी होगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और पूरी मेहनत से परीक्षा की तैयारी करें। उन्होंने सरकार के इस फैसले को झारखंड की 'जनजातीय अस्मिता' को सम्मान देने वाला कदम बताया।
कार्यक्रम में ये भी रहे मौजूद
इस अभिनंदन समारोह में भूमिज समाज के कई दिग्गज और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य रूप से उदय सरदार, दीपक सरदार, फूलचंद सरदार, भारत सरदार, गोपीनाथ सरदार, मजोहर सरदार, संजय सरदार, लाल सरदार के साथ-साथ ग्राम प्रधान भुगनू सरदार, मधु सरदार, बिहारी लाल सरदार एवं मुखिया काली पदो सरदार उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त पोटका प्रखंड के विभिन्न गांवों से आए सैकड़ों ग्रामीणों ने विधायक संजीव सरदार के इस कार्य की सराहना की और समाज की एकता को बनाए रखने का संकल्प लिया।

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