जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में प्रकृति का महापर्व सरहुल शुक्रवार को पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय सरहुल पूजा समिति, पूर्वी सिंहभूम के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में आदिवासी एवं मूलवासी समाज के लोग शामिल हुए।

सरना स्थलों पर पूजा-अर्चना, खुशहाली की कामना

सुबह से ही जिले के विभिन्न सरना स्थलों पर पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। आदिवासी समाज के महिला-पुरुषों ने फल, फूल, दूध, धूप-धूवन अर्पित कर प्रकृति देवता से परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। सीतारामडेरा में पाहन बुधु मिंज एवं भोला कच्छप, बिरसानगर में महावीर कुजूर, उलीडीह में पांडु कुजूर, शंकोशाई में बासु लकड़ा, बागबेड़ा में बुधराम टोप्पो और लक्ष्मीनगर में अनादि उरांव की देखरेख में विधिवत पूजा संपन्न हुई।

भव्य शोभायात्रा में झलकी परंपरा और एकता

दोपहर तीन बजे से सीतारामडेरा में लोग पारंपरिक परिधान और वाद्य यंत्रों के साथ एकत्रित हुए। शोभायात्रा प्रारंभ होने से पहले समिति द्वारा विभिन्न समाज के अगुवाओं, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। इसके बाद शोभायात्रा सीतारामडेरा से निकलकर लाको बोदरा चौक, एग्रिको लाइट सिग्नल, भालूबासा चौक, साकची, कालीमाटी रोड, टुइलाडूंगरी, गोलमुरी होते हुए पुनः सीतारामडेरा में समाप्त हुई।
शोभायात्रा में उरांव, हो, मुंडा, भुईयां, तुरी, लोहरा समेत विभिन्न समुदायों के महिला-पुरुष, युवक-युवतियां और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। आदिवासी वाद्य यंत्रों की थाप पर नृत्य करते हुए लोगों ने प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। जगह-जगह लगाए गए बैनर और बच्चों के हाथों में कटआउट आकर्षण का केंद्र रहे।

सामूहिक सहभागिता से सफल आयोजन

शोभायात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा सेवा शिविर लगाए गए, जहां लोगों को पानी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। कार्यक्रम को सफल बनाने में राकेश उरांव, सुखराम लकड़ा, नंदलाल पातर, राजश्री नाग, राजेश कांडयांग, शालू लकड़ा, संतोष लकड़ा, किशोर लकड़ा, सुरा बिरुली, राजन कुजूर, शंभू मुखी, दुर्गामनी बोईपाई, नीतू कालिंदी, उपेन्द्र बानरा, प्रेम आनंद सामड, रवि सवैया, गोपाल टोप्पो, लक्ष्मण मिंज सहित अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।