जमशेदपुर। लौहनगरी जमशेदपुर की औद्योगिक क्षमता को वैश्विक मानचित्र पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने और माल परिवहन की व्यवस्था को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल शुरू की है। सोमवार को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में 'प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना' के अंतर्गत जमशेदपुर औद्योगिक शहर के लिए एक समेकित (Integrated) लॉजिस्टिक प्लान तैयार करने को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में शहर के बड़े औद्योगिक घरानों, चैंबर ऑफ कॉमर्स और बुनियादी ढांचा विकसित करने वाली एजेंसियों के साथ भविष्य की रूपरेखा पर विस्तार से मंथन किया गया। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जमशेदपुर जैसे विशाल औद्योगिक हब के लिए एक सुव्यवस्थित लॉजिस्टिक नेटवर्क समय की मांग है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना है, जिससे न केवल उद्योगों की परिचालन लागत (Logistic Cost) में कमी आएगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी जबरदस्त गति मिलेगी। उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया ताकि सड़क, रेल और अन्य परिवहन अवसंरचनाओं का विकास इस तरह हो कि वे एक-दूसरे के पूरक बन सकें।


माल परिवहन की दक्षता बढ़ाने और उद्योगों की लागत कम करने पर जोर

बैठक के दौरान औद्योगिक क्षेत्र के सुचारू विकास और परिवहन की सुगमता को लेकर गहन चर्चा की गई। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि पीएम गति शक्ति योजना के माध्यम से हमारा लक्ष्य माल परिवहन की दक्षता को अधिकतम स्तर पर ले जाना है। वर्तमान में लॉजिस्टिक पर होने वाला अतिरिक्त खर्च उद्योगों के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे कम करने के लिए रेल और सड़क नेटवर्क का बेहतर समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिया कि शहर के भीतर और बाहर औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए उन बाधाओं को चिन्हित किया जाए जो माल ढुलाई की रफ्तार धीमी करती हैं। उपायुक्त ने संबंधित विभागों और संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ एक विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने को कहा है, जिसे अंतिम रूप देकर भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस योजना के सफल क्रियान्वयन से जमशेदपुर के उद्योगों को निर्यात और घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।

अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक मांगे सुझाव, अनुभवी कंसलटेंट की ली जाएगी मदद

योजना को धरातल पर उतारने के लिए उपायुक्त ने समय सीमा भी निर्धारित कर दी है। उन्होंने जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक को निर्देश दिया कि वे सभी स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें और अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक सभी आवश्यक सुझाव आमंत्रित करें। योजना को तकनीकी रूप से सुदृढ़ और भविष्योन्मुखी बनाने के लिए आवश्यकतानुसार अनुभवी कंसलटेंट की सेवाएं लेने की भी बात कही गई है, जो एक समेकित और व्यवहारिक प्रतिवेदन तैयार करेंगे। उपायुक्त ने रेखांकित किया कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही लॉजिस्टिक प्लान की रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए। इस दौरान उन्होंने एनएचएआई (NHAI) और रेलवे के प्रतिनिधियों से भी समन्वय स्थापित कर बुनियादी ढांचे के विस्तार की संभावनाओं को तलाशने का निर्देश दिया।

टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और चैंबर ऑफ कॉमर्स ने साझा किए महत्वपूर्ण सुझाव

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में जमशेदपुर के बड़े औद्योगिक घरानों और व्यापारिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही। टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, नुवोको सीमेंट जैसी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स, एनएचएआई और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों ने अपनी आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों से प्रशासन को अवगत कराया। स्टेकहोल्डर्स ने लॉजिस्टिक प्लान को प्रभावी बनाने के लिए पार्किंग हब, चौड़ी सड़कें, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और वेयरहाउसिंग सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में इस बात पर सहमति जताई कि जमशेदपुर के औद्योगिक विकास के लिए एक एकीकृत लॉजिस्टिक मास्टर प्लान मील का पत्थर साबित होगा। बैठक के अंत में सभी एजेंसियों ने इस साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने और डेटा साझा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।