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आदिवासी सेंगेल अभियान ने सरना धर्म को संवैधानिक मान्यता देने की मांग की

जमशेदपुर: साकची स्थित पूर्वी सिंहभूम जिला उपायुक्त कार्यालय के समक्ष सोमवार को आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सेंगेल अभियान से जुड़े कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की और सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। धरना शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया, जिसमें आदिवासी समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरना धर्म कोड को संवैधानिक मान्यता दिलाना और आदिवासी पहचान की रक्षा करना था।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन

धरना-प्रदर्शन के बाद सेंगेल अभियान के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में प्रमुख रूप से सरना धर्म कोड को जल्द से जल्द संवैधानिक मान्यता देने की मांग की गई। साथ ही आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त कर उसमें लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक सुधार लागू करने की भी बात कही गई। प्रतिनिधिमंडल ने यह स्पष्ट किया कि उनकी मांगें केवल धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों से भी जुड़ी हैं।

केंद्र सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

सेंगेल दिशोम परगना सोनाराम सोरेन ने धरना के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में सरना धर्म को मानने वालों की संख्या करोड़ों में है। इसके बावजूद अब तक इस धर्म को अलग पहचान नहीं मिलना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति आदिवासी समाज के साथ अन्याय के समान है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही है, लेकिन सरकार द्वारा इस पर ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे आदिवासी समाज में असंतोष बढ़ रहा है।

संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला और पहचान की चिंता

सेंगेल अभियान के कार्यकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि यह सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में आदिवासियों के लिए अलग सरना धर्म कोड लागू करना जरूरी है, ताकि उनकी धार्मिक पहचान सुरक्षित रह सके। कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई कि अलग कोड नहीं होने के कारण आदिवासियों को जबरन अन्य धर्मों—जैसे हिंदू, ईसाई या मुस्लिम—में शामिल किया जाता है, जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान खतरे में पड़ रही है। धरना में भागीरथी मुर्मू, अर्जुन मुर्मू, महेंद्र टुडू, सुनाराम बेसरा, धनेश्वर हांसदा, मर्शाल टुडू, लोसो मुर्मू, जोगोन टुडू, नारान मुर्मू और जगन्नाथ मार्डी समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

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