Jharkhand: झारखंड में पेसा नियमावली-2025 को धरातल पर उतारने की कवायद अब तेज हो गई है। राज्य सरकार की मंशा है कि पेसा कानून की मूल भावना के अनुरूप ग्रामसभाओं को वास्तविक रूप में सशक्त और अधिकार संपन्न बनाया जाए। इसी उद्देश्य से राज्यभर में संबंधित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और पंचायत स्तर के कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब तक ग्रामसभा मजबूत नहीं होगी, तब तक आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन की अवधारणा पूरी तरह लागू नहीं हो सकती। इसलिए प्रशिक्षण के माध्यम से पेसा कानून की बारीकियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रमंडल स्तर पर कार्यशालाओं का आयोजन


पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के विभिन्न प्रमंडलों में लगातार कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत कोल्हान प्रमंडल के घाटशिला से हुई, जहां 27 और 28 फरवरी को दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसके बाद 13 और 14 मार्च को दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। वहीं, 18 और 19 मार्च को संताल परगना के गोड्डा में भी प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। इन कार्यशालाओं में बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए, जिन्हें पेसा नियमावली के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया।

मास्टर ट्रेनर पंचानन सोरेन की अहम भूमिका


इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर पंचानन सोरेन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने प्रतिभागियों को पेसा कानून के तहत ग्रामसभा के अधिकार, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक ढांचे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पेसा नियमावली के तहत ग्रामसभा को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं, जिनका सही उपयोग करने से गांवों में पारदर्शिता और विकास को बढ़ावा मिलेगा। पंचानन सोरेन ने यह भी कहा कि प्रमंडल स्तर के बाद अब जिला स्तर पर गहन प्रशिक्षण अभियान चलाया जाएगा, जिससे पेसा कानून का लाभ हर गांव तक पहुंच सके।

ग्रामसभा को मजबूत बनाने के लिए तय समयसीमा


पेसा नियमावली को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने ग्रामसभा स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण कार्यों के लिए समयसीमा भी निर्धारित की है। मास्टर ट्रेनर पंचानन सोरेन के अनुसार, 16 मार्च से 25 अप्रैल तक सभी ग्रामसभाओं को अपना बैंक खाता खोलना, सहायक सचिव का चयन करना और ग्रामसभा के लिए विधिवत कार्यालय सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। यह कदम ग्रामसभा को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार को उम्मीद है कि तय समयसीमा के भीतर ये सभी कार्य पूरे होने से पेसा नियमावली का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो सकेगा और आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन की अवधारणा को मजबूती मिलेगी।