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झारखंड आंदोलनकारियों का फूटा गुस्सा, हक और सम्मान की मांग को लेकर डीसी ऑफिस पर किया प्रदर्शन

जमशेदपुर: साकची स्थित उपायुक्त कार्यालय परिसर में सोमवार को झारखंड आंदोलनकारियों का गुस्सा खुलकर सामने आया। झारखंड राज्य के गठन के लिए संघर्ष करने वाले दर्जनों आंदोलनकारी एकजुट होकर अपनी लंबित मांगों को लेकर डीसी कार्यालय पहुंचे और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने तीर-धनुष, तख्तियां और बैनर लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन पूरी तरह संगठित और आक्रोशपूर्ण था, जिसमें आंदोलनकारियों ने अपनी उपेक्षा को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से वे अपनी पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है। इस दौरान पूरे परिसर में “हक दो, सम्मान दो” जैसे नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल काफी गर्म हो गया।

लंबित मांगों और प्रशासनिक उपेक्षा पर नाराजगी

आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले लोगों को आज नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना था कि जिन लोगों ने अलग राज्य के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उन्हें आज उनके ही राज्य में सम्मान के लिए भटकना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होने के बावजूद जिला प्रशासन पहचान प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कर रहा है। यह देरी न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि आंदोलनकारियों के आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार आवेदन और अनुरोध देने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे उनमें आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

सम्मान पत्र और पहचान की प्रमुख मांग

आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि सभी चिन्हित झारखंड आंदोलनकारियों को जल्द से जल्द आधिकारिक सम्मान पत्र और पहचान पत्र जारी किया जाए। उनका कहना है कि यह केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और बलिदान की मान्यता का प्रतीक है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस झारखंड राज्य को उन्होंने अपने खून-पसीने और युवावस्था के बलिदान से हासिल किया, आज उसी राज्य में उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यह स्थिति बेहद पीड़ादायक और अपमानजनक है।
उन्होंने यह भी मांग की कि आंदोलनकारियों को राज्य स्तर पर राजकीय सम्मान दिया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी उनके योगदान को समझ सके और उनका सम्मान कर सके।

उग्र आंदोलन की चेतावनी, मशाल जुलूस की तैयारी

प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अगर अनदेखी जारी रही तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
आंदोलनकारियों ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में यदि सम्मान पत्र वितरण और राजकीय सम्मान देने की प्रक्रिया शुरू नहीं होती है, तो वे पूरे जिले में मशाल जुलूस निकालेंगे और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ लोगों की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड आंदोलन के सम्मान की है। इसलिए वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपने हक व अधिकार के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेंगे।

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