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दलमा सेंदरा की तैयारी शुरू, जल्द ही तिथि की घोषणा होगी

 आदिवासी समाज के ऐतिहासिक और पारंपरिक शिकार पर्व 'दलमा बुरू सेंदरा' (जानी शिकार) को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। शुक्रवार को परसुडीह क्षेत्र के सरजामदा में 'दलमा बुरू सेंदरा समिति' की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। दलमा राजा राकेश हेंब्रम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में इस वर्ष होने वाले सेंदरा महोत्सव की रूपरेखा और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य सेंदरा के सफल संचालन के लिए प्रबंधन समिति का गठन और आगामी कार्यक्रमों की रणनीति तय करना था।


तीन राज्यों के सेंदरा वीरों को भेजा जाएगा 'गिरा सकाम'

बैठक को संबोधित करते हुए दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने कहा कि सेंदरा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता और वीरता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्य ओडिशा और पश्चिम बंगाल के दिसुआ सेंदरा वीरों को पारंपरिक निमंत्रण यानी 'गिरा सकाम' भेजा जाएगा। सेंदरा की तिथि को लेकर फिलहाल मंथन का दौर जारी है। राजा हेंब्रम ने स्पष्ट किया कि प्रकृति और परंपरा के बीच सामंजस्य बिठाते हुए जल्द ही तिथि की घोषणा की जाएगी।

स्वशासन व्यवस्था के साथ विचार-विमर्श के बाद तय होगी तारीख

सेंदरा की सटीक तिथि तय करने के लिए समाज के प्रबुद्ध जनों और स्वशासन व्यवस्था के प्रमुखों के साथ एक वृहत बैठक बुलाई जाएगी। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के परगना, तोरोप परगना, माझी बाबा, शिक्षाविदों और अनुभवी सेंदरा वीरों के साथ गहन चर्चा की जाएगी। सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए तिथि फाइनल होते ही दिसुआ सेंदरा वीरों को विधिवत निमंत्रण भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। समिति का प्रयास है कि इस बार सेंदरा पर्व को पूरी तरह अनुशासित और पारंपरिक मर्यादाओं के अनुरूप संपन्न कराया जाए।

प्रबंधन समिति का गठन, सौंपी गई जिम्मेदारी

सेंदरा समिति की विभिन्न सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए शुक्रवार को एक 'प्रबंधन समिति' का गठन किया गया। इस समिति में शामिल सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं, जो सेंदरा के दौरान सुरक्षा, रसद और पारंपरिक अनुष्ठानों की देखरेख करेंगे। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि दलमा बुरू सेंदरा के प्रति युवाओं में जागरूकता बढ़ाना और अपनी जड़ों से जोड़ना समय की मांग है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से लाल सिंह गागराई, लिटा बानसिंह, भगत मुर्मू, संपूर्ण सांवैया, राम हांसदा, धानो मार्डी, शांति सिदू समेत समाज के कई गणमान्य लोग और कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में सेंदरा पर्व को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।

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