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मांदर की थाप पर थिरकेगा लौहनगरी, आज निकलेगी भव्य सरहुल शोभायात्रा

Jamshedpur sarhul 2026 : प्रकृति पर्व सरहुल के पावन अवसर पर शनिवार को लौहनगरी जमशेदपुर की सड़कों पर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम दिखेगा. केंद्रीय सरहुल पूजा समिति, पूर्वी सिंहभूम की ओर से भव्य शोभायात्रा निकाली जायेगी, जिसमें आदिवासी-मूलवासी समाज की समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी. शनिवार दोपहर 3:30 बजे पुराना सीतारामडेरा उरांव समाज भवन प्रांगण से इस उत्सव का शंखनाद होगा. पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु मांदर और नगाड़े की गूंज के बीच झूमते-गाते प्रकृति की आराधना करेंगे.
सीतारामडेरा से साकची तक सजेगी झांकी

शोभायात्रा पुराना सीतारामडेरा से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेगी. यह यात्रा लाको सीतारामडेरा बोदरा चौक, एग्रिको, भालुबासा, रामलीला मैदान, साकची गोलचक्कर और बसंत टॉकीज होते हुए वापस अपने उद्गम स्थल सीतारामडेरा पहुंचकर संपन्न होगी. इस दौरान पूरा मार्ग ''जय सरना'' के जयघोष से गुंजायमान रहेगा. शोभायात्रा में उरांव, हो, मुंडा, मुखी, भुइयां, लोहरा और तुरी समेत विभिन्न जनजातीय समुदायों के लोग अपनी पारंपरिक पहचान के साथ शामिल होंगे. समिति ने सुरक्षा और अनुशासन को लेकर विशेष तैयारी की है.

सुबह पाहन करेंगे पूजा, शाम को सजेगी जनसभा
शोभायात्रा से पूर्व शनिवार सुबह शहर के विभिन्न सरना स्थलों पर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे. सीतारामडेरा, बागुनहातु, बिरसानगर, लक्ष्मीनगर, मानगो, बागबेड़ा और उलीडीह समेत अन्य पूजा स्थलों पर पाहन द्वारा सखुआ (साल) के फूलों के साथ देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की जायेगी. समाज के लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि और उन्नति के लिए पाहन से आशीर्वाद लेंगे. शाम को शोभायात्रा के समापन के बाद पुराना सीतारामडेरा आदिवासी उरांव समाज प्रांगण में एक भव्य सरहुल पूजा जनसभा का आयोजन किया जायेगा, जहां समाज के प्रबुद्ध जन प्रकृति संरक्षण का संदेश देंगे.

अनुशासन व पारंपरिक परिधान पर मिलेगा सम्मान
इस वर्ष समिति ने उत्सव को और भी व्यवस्थित बनाने के लिए खास पहल की है. जनसभा के दौरान उन समूहों को विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा, जो परंपरा और अनुशासन की मिसाल पेश करेंगे. इसके तहत ''सर्वश्रेष्ठ ड्रेस कोड'' और ''सर्वश्रेष्ठ अनुशासित टीम'' को चिह्नित कर उन्हें सम्मानित किया जायेगा. आयोजकों का कहना है कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य नयी पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ना है. शहर भर में सरहुल को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है और विभिन्न चौक-चौराहों पर स्वागत की तैयारियां अंतिम चरण में है.

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