जमशेदपुर: उत्तर पूर्वी गदड़ा पंचायत में बिजली की लचर व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के घोर अभाव को लेकर ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे गया है। लंबे समय से उपेक्षा का दंश झेल रहे ग्रामीणों का आक्रोश सड़क से होता हुआ अब सीधे विभाग के दफ्तर तक पहुंच चुका है। पंचायत समिति सदस्य सोमबारी पात्रो और पूर्व उपमुखिया बिरजू पात्रो के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने विद्युत कार्यपालक अभियंता से मुलाकात कर क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं पर एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि जर्जर तारों और असुरक्षित खंभों के कारण पूरा इलाका किसी बड़ी अनहोनी के मुहाने पर खड़ा है। विभाग को चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं हुआ, तो समूची पंचायत उग्र आंदोलन के लिए सड़क पर उतरने को विवश होगी।
बांस के खंभों के सहारे चल रही बिजली: मौत का खुला निमंत्रण
प्रतिनिधिमंडल ने कार्यपालक अभियंता का ध्यान सबसे पहले बड़ा गदड़ा जमुना नगर की भयावह स्थिति की ओर आकर्षित किया। अधिकारियों को अवगत कराया गया कि इस घनी आबादी वाले क्षेत्र में आज भी कंक्रीट या लोहे के खंभों के बजाय बांस के खंभों के सहारे नंगे तारों को खींचकर पूरी बस्ती में बिजली का कनेक्शन दिया गया है। हवा चलते ही ये बांस के खंभे झूलने लगते हैं, जिससे तारों के टूटने और शॉर्ट सर्किट होने का खतरा हमेशा बना रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह व्यवस्था न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि राहगीरों और बच्चों के लिए किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इन असुरक्षित बांस के खंभों को तुरंत हटाकर वहां मानकों के अनुरूप नए कंक्रीट के खंभे गाड़े जाएं।
जर्जर तार और कम वोल्टेज: जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त
गदड़ा पंचायत के अंतर्गत आने वाले ड्राइवर कॉलोनी, बालीडूंगरी और तिलकानगर जैसे इलाकों में बिजली की समस्या केवल खंभों तक सीमित नहीं है। इन क्षेत्रों में लगे तार दशकों पुराने और जर्जर हो चुके हैं, जो बार-बार टूटकर गिरते रहते हैं। इसके अतिरिक्त, पूरे क्षेत्र में 'लो-वोल्टेज' की समस्या ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। कम वोल्टेज के कारण न तो घरों के उपकरण चल पा रहे हैं और न ही पेयजल आपूर्ति के लिए मोटर का उपयोग हो पा रहा है। गर्मी के मौसम की दस्तक के साथ ही वोल्टेज की इस समस्या ने विद्यार्थियों की पढ़ाई और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने जर्जर तारों को बदलकर क्षमता विस्तार (Capacity Enhancement) की मांग उठाई है।
भूमिज टोला में बुनियादी ढांचे का अभाव और विभाग की अनदेखी
प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से भूमिज टोला का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से काट दिया गया है। यहाँ बिजली के खंभों की भारी कमी है, जिसके कारण लोग लंबी दूरी से तार खींचकर अपने घरों तक बिजली ले जाने को मजबूर हैं। इससे न केवल दुर्घटना की आशंका रहती है, बल्कि तकनीकी नुकसान भी अधिक होता है। पूर्व उपमुखिया बिरजू पात्रो ने अभियंता से कहा कि भूमिज टोला के निवासियों को भी सुरक्षित बिजली पाना उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने विभाग को सुझाव दिया कि एक विशेष सर्वे कराकर उन सभी पॉइंट्स को चिह्नित किया जाए जहाँ नए खंभों और ट्रांसफार्मर की आवश्यकता है, ताकि बिजली की बर्बादी को रोका जा सके और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
झामुमो नेताओं का समर्थन और आंदोलन की स्पष्ट चेतावनी
इस विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का भी भरपूर समर्थन मिला। बैठक में उपस्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता मिथुन चक्रवर्ती, नितिन और डॉ. अरुण दास ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासन ग्रामीणों की सहनशक्ति की परीक्षा न ले। प्रतिनिधिमंडल ने विभाग को दो टूक लहजे में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ, तो वे विद्युत कार्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगे। वार्ता के अंत में विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया कि जल्द ही एक तकनीकी टीम को गदड़ा पंचायत भेजकर वस्तुस्थिति का आकलन कराया जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर बांस के खंभों को बदलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस मौके पर मंटू पात्रो, बरियाड़ सोरेन, विजय कच्छप, जमुना प्रसाद, रंजन प्रजापति, मनोज वर्मा और संतोष पात्रो समेत दर्जनों ग्रामीण उपस्थित थे।

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