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धनबाद में एसीसी की सौर सिंचाई पहल से किसानों को राहत, टिकाऊ खेती को मिला बढ़ावा

Dhanbad News: झारखंड के धनबाद जिले में अब खेती का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है। एसीसी लिमिटेड ने यहां सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देकर किसानों की बड़ी समस्या का समाधान किया है। खासकर छताटांड़ और समलापुर गांवों में लगाए गए सोलर पंप किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आए हैं। पहले जहां किसान बारिश और डीज़ल पंप पर निर्भर थे, अब वे सौर ऊर्जा से अपने खेतों की सिंचाई कर पा रहे हैं। इससे खेती करना आसान और सस्ता हो गया है।


छोटे किसानों को मिल रहा सीधा लाभ

 
इस पहल का सबसे ज्यादा फायदा छोटे और सीमांत किसानों को मिल रहा है। एसीसी द्वारा लगाए गए 5 एचपी के सोलर सिंचाई सिस्टम से करीब 15 एकड़ से अधिक जमीन की सिंचाई हो रही है। पहले जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं थे, अब वे भी आसानी से अपनी फसल को पानी दे पा रहे हैं। इससे उनकी खेती पर निर्भरता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ा है।

लागत में भारी कमी, आमदनी में बढ़ोतरी

 
सौर सिंचाई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों की लागत कम हो रही है। पहले जहां डीज़ल और बिजली पर काफी खर्च होता था, अब वह लगभग खत्म हो गया है। एक अनुमान के अनुसार, किसान हर सीजन में करीब 30,000 रुपये तक की बचत कर रहे हैं। इसके साथ ही सिंचाई सही समय पर होने से फसल की पैदावार भी बढ़ी है, जिससे किसानों की आय में भी सुधार हुआ है।

बिजली और डीज़ल पर निर्भरता हुई कम

 
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बिजली की समस्या रहती है। कई बार बिजली समय पर नहीं मिलती, जिससे सिंचाई प्रभावित होती है। लेकिन सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप इस समस्या का समाधान बन रहे हैं। अब किसानों को न तो बिजली कटौती की चिंता रहती है और न ही डीज़ल के बढ़ते दाम की। इससे खेती लगातार और बेहतर तरीके से हो पा रही है।

पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद पहल


 यह पहल सिर्फ किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बहुत फायदेमंद है। सौर सिंचाई प्रणाली से हर साल कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है। अनुमान है कि एक सोलर पंप से लगभग 1.5 टन तक कार्बन उत्सर्जन कम होता है। इससे जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने में भी मदद मिल रही है और खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है।


प्रशिक्षण और जागरूकता से बढ़ी स्वीकार्यता

 
एसीसी लिमिटेड ने सिर्फ उपकरण ही नहीं दिए, बल्कि किसानों को इसके उपयोग के बारे में भी जानकारी दी। जागरूकता सत्र और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे किसानों को नई तकनीक को समझने में मदद मिली। एक किसान ने बताया कि अब उन्हें डीज़ल या बिजली की चिंता नहीं रहती और वे अपनी जरूरत के अनुसार खेती कर सकते हैं। यह पहल न केवल खेती को आसान बना रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रही है। एसीसी का यह प्रयास भविष्य में टिकाऊ और हरित कृषि की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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