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सीएनटी एक्ट की जमीन आवंटन पर विवाद, कुड़मी समाज कोर्ट जाएगा

जमशेदपुर : कदमा स्थित मेरिन ड्राइव क्षेत्र में प्रस्तावित जगन्नाथ मंदिर निर्माण को लेकर भूमि आवंटन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। झारखंड मूलवासी अधिकार मंच एवं टाटा विस्थापित आंदोलनकारी मंच के संयोजक हरमोहन महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा उड़िया समाज को मात्र एक रुपये के निबंधन शुल्क पर दी गई लीज बंदोबस्ती को रद्द करने की मांग की है।
मामला लगभग 2.5 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिस पर श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट (एसजेएससीसीसीटी) द्वारा मंदिर निर्माण का शिलान्यास किया गया है। हरमोहन महतो का दावा है कि इस भूमि के वास्तविक स्वामी कुड़मी समाज के लोग हैं, जिनके पास वर्ष 1908 और 1937 के खतियान मौजूद हैं। ऐसे में यह भूमि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) के दायरे में आती है, जिसके तहत बिना कानूनी प्रक्रिया के जमीन का हस्तांतरण संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि सीएनटी एक्ट में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी धार्मिक या अन्य संस्था को जमीन हस्तांतरित करनी हो, तो संबंधित रैयत या खतियानधारी की सहमति और सहभागिता अनिवार्य होती है। इस मामले में न तो रैयतों की सहमति ली गई और न ही उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया, जो कानून का उल्लंघन है।
हरमोहन महतो ने यह भी बताया कि वर्ष 1985 से 1995 तक यह भूमि टाटा लीज क्षेत्र में थी। बाद में वर्ष 2005 में लीज नवीकरण के दौरान इस भूखंड को लीज से बाहर कर दिया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस जमीन का अधिग्रहण कर इसे उड़िया समाज को आवंटित कर दिया, जिसे उन्होंने पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है।
उन्होंने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी जमीन के लीज से बाहर होने के बाद उसे मूल रैयतों को लौटाना अनिवार्य होता है। लेकिन इस मामले में न तो जमीन वापस की गई और न ही रैयतों को मुआवजा दिया गया, जो गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।
महतो ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं करती है, तो कुड़मी समाज के लोग सामूहिक रूप से न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि समाज अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने को पूरी तरह तैयार है।

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