झारखंड में आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत: केरूआडूंगरी बना मिसाल

झारखंड के जमशेदपुर स्थित केरूआडूंगरी पंचायत से ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की एक नई कहानी लिखी जा रही है। स्वच्छतापुकारे फाउंडेशन द्वारा यहां राज्य का पहला RuTAG (Rural Technology Action Group) आधारित रूरल स्मार्ट विलेज सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह पहल Office of Principal Scientific Adviser (PSA) के मार्गदर्शन में संचालित हो रही है, जिसमें देश के सात प्रमुख आईआईटी संस्थानों का तकनीकी सहयोग शामिल है।
इस केंद्र का उद्देश्य गांव की महिलाओं, विशेषकर स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। फूड डिहाइड्रेशन, पैकेजिंग, सोलर पंप जैसी उपयोगी तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्थानीय संसाधनों के आधार पर आय के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। यह पहल न केवल रोजगार सृजन करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी।

महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत मॉडल
स्वच्छतापुकारे फाउंडेशन पहले से ही देश के विभिन्न राज्यों में 13 RuTAG केंद्रों पर इम्प्लीमेंटेशन पार्टनर के रूप में कार्य कर रहा है। त्रिपुरा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में स्थापित पांच केंद्रों पर महिलाओं के लिए सस्टेनेबल आय के सफल मॉडल विकसित किए जा चुके हैं, जिनसे सैकड़ों महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं।
इसी अनुभव के आधार पर झारखंड में आठ नए RuTAG केंद्रों का चयन किया गया है, जिनमें केरूआडूंगरी पहला केंद्र है। यहां अप्रैल के पहले सप्ताह से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। प्रारंभिक चरण में महिलाओं को जलकुंभी (Water Hyacinth) से बैग, फाइल और सजावटी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल खास इसलिए भी है क्योंकि जलकुंभी एक पर्यावरणीय समस्या मानी जाती है, जिसे उपयोगी उत्पादों में बदलकर आय का स्रोत बनाया जाएगा।
स्थल निरीक्षण के दौरान SHG महिलाओं में सीखने और आत्मनिर्भर बनने को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। यह उत्साह इस बात का संकेत है कि यह केंद्र गांव में बदलाव की नई लहर लाने वाला है।

गांव के समग्र विकास की ओर एक बड़ा कदम
इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पर्यावरणविद् एवं प्रशिक्षक गौरव आनंद के साथ विस्तृत चर्चा की गई है, जिनके तकनीकी मार्गदर्शन में इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का भी इस पहल को भरपूर समर्थन मिल रहा है।
युवा मुखिया कान्हू मुर्मू ने इसे पंचायत के लिए ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि इससे गांव की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही प्रशिक्षण और रोजगार मिलेगा। वहीं, ग्राम प्रधान और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी इस केंद्र को सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिया है।
स्वच्छतापुकारे फाउंडेशन की यह पहल केवल एक प्रशिक्षण केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मॉडल रूरल स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित होगा, जो तकनीक, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता का संगम पेश करेगा। आने वाले समय में यह केंद्र झारखंड के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा और राज्य में सतत विकास की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगा।

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