श्मशान भूमि पर नगर निगम कार्यालय का विरोध, बालीगुमा ग्रामसभा ने दी आंदोलन की चेतावनी

जमशेदपुर: मानगो क्षेत्र के बालीगुमा में आदिवासी समुदाय ने अपनी पारंपरिक आस्था और जमीन की रक्षा के लिए एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया है। माझी बाबा रमेश चंद्र मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामसभा में ग्रामीणों ने वार्ड संख्या-10 स्थित श्मशान भूमि पर प्रस्तावित मानगो नगर निगम कार्यालय के निर्माण का जोरदार विरोध किया।
ग्रामसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि खाता संख्या-727 और प्लॉट संख्या-799 पर किसी भी परिस्थिति में नगर निगम कार्यालय का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि वर्षों से श्मशान घाट के रूप में उपयोग में है और क्षेत्र के कई टोला—डाहारटोला, खिखड़ीघुटू, धर्मबंधा, गजरडीह और ऊपरटोला—के लोग यहां अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करते हैं।
ग्रामसभा के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि प्रशासन द्वारा जबरन निर्माण कार्य कराने का प्रयास किया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। अपने विरोध को स्पष्ट रूप से दर्शाने के लिए ग्रामसभा की ओर से श्मशान स्थल पर एक सूचना बोर्ड भी लगाया गया है, जिसमें बाहरी लोगों के अनाधिकृत प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है।
माझी बाबा रमेश चंद्र मुर्मू ने कहा कि श्मशान भूमि पर नगर निगम कार्यालय बनाने का प्रस्ताव पूरी तरह अनुचित और समझ से परे है। उन्होंने बताया कि इसी स्थल के समीप संताल आदिवासियों का धार्मिक स्थल ‘बिदु-चांदान जाहेरगाढ़’ भी स्थित है, जो समुदाय की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी प्रकार का निर्माण कार्य आदिवासी परंपराओं और धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा।
उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि श्मशान भूमि और जाहेरगाढ़ स्थल को सुरक्षित करने के लिए जल्द से जल्द चहारदीवारी का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद उत्पन्न न हों।
ग्रामसभा में नायके बाबा मोहन हांसदा, जोग माझी बाबा लुगू हांसदा, गोडेत बाबा गणेश मार्डी सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे अपनी जमीन और परंपरा की रक्षा के लिए “आर-पार की लड़ाई” लड़ने को तैयार हैं।

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