जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला स्थित पावड़ा में आगामी 28 और 29 मार्च को माझी परगना महाल धाड़ दिशोम का 15वां दो दिवसीय महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस महासम्मेलन को लेकर शनिवार को पावड़ा स्थित माझी परगना महाल बखुल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता देश परगना बैजू मुर्मू ने की। बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से आए माझी-परगना बाबा एवं सामाजिक प्रतिनिधियों ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की और आदिवासी संताल समाज की भाषा, संस्कृति तथा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस महासम्मेलन में झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम से हजारों की संख्या में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से जुड़े अगुवा और प्रतिनिधि भाग लेंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की एकता को मजबूत करना, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना तथा पारंपरिक प्रशासनिक प्रणाली को सशक्त बनाना है।
देश परगना बैजू मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को बनाए रखने के लिए उनके पारंपरिक रीति-रिवाज, न्याय प्रणाली और जीवन के हर चरण से जुड़े संस्कारों का संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा, तभी उसका समग्र विकास संभव हो सकेगा।
बैठक के दौरान पेसा (PESA) कानून और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से आदिवासी समाज को स्वशासन का अधिकार मिल सकता है और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। इसके लिए समाज के सभी अगुवाओं को एकजुट होकर निस्वार्थ भाव से नेतृत्व करना होगा।
इस बैठक में तोरोप परगना हरिपोदो मुर्मू, दसमत हांसदा, बैजू टुडू, कुनाराम टुडू, सुशील मुर्मू, कुंवरलाल मांडी, परगना आयो पुंता मुर्मू, पद्मावती हेंब्रम, राजेंद्र प्रसाद टुडू और दुर्गा चरण मुर्मू समेत बड़ी संख्या में समाज के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे। महासम्मेलन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और इसे आदिवासी एकता के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है।