ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस की नेशनल एग्जीक्यूटिव बैठक के दूसरे दिन अपने संबोधन में मंत्री तिर्की ने देश के विभिन्न राज्यों से आए स्टेट कोऑर्डिनेटर्स और प्रदेश अध्यक्षों के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की समस्याएं लगभग पूरे देश में एक जैसी हैं। उन्होंने कहा कि चाहे झारखंड हो, छत्तीसगढ़, ओडिशा या पूर्वोत्तर के राज्य—हर जगह आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। हालांकि, भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय संसाधनों के आधार पर कई राज्यों में अलग-अलग प्रकार की चुनौतियां भी सामने आती हैं।
मंत्री ने विशेष रूप से लैंड एलियनेशन (भूमि हस्तांतरण), डीलिमिटेशन (सीमांकन), जनगणना और भूमि डिजिटलीकरण जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर ठोस और प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है, ताकि आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। भूमि से जुड़े मुद्दे आदिवासियों के जीवन और आजीविका से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए इनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर समुदायों की भागीदारी को भी मजबूत करना होगा, ताकि नीतियों का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। मंत्री तिर्की ने यह भी कहा कि आदिवासी समाज की आवाज को मजबूत करने के लिए संगठित प्रयास और जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
अंत में उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने राज्यों में जाकर आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करें और एक सशक्त आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ें।
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