यूसीआईएल परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर समीक्षा बैठक, 80 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की योजना पर चर्चा

जमशेदपुर : यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की परियोजना से प्रभावित विस्थापित रैयतों के पुनर्वास को लेकर मंगलवार को जिला परिषद सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी (धालभूम) श्री अर्णव मिश्रा ने की। बैठक में परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की वर्तमान स्थिति, आवश्यक संसाधनों तथा आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में पथ, पेयजल और विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता, भू-अर्जन विभाग के अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी मुसाबनी एवं पोटका सहित अन्य विभागीय पदाधिकारी तथा यूसीआईएल के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने पुनर्वास प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं और संभावित समाधान पर अपने विचार साझा किए।
बैठक के दौरान यूसीआईएल के प्रतिनिधियों ने मौजा-भाटिन के टोला चाटिकोचा में स्थित यूसीआईएल माइंस के टेलिंग पोंड (थर्ड स्टेज) के लिए अधिग्रहित भूमि से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की योजना की जानकारी दी। बताया गया कि इस परियोजना के कारण कुल 60 परिवार विस्थापित हुए थे, लेकिन समय के साथ इनकी संख्या बढ़कर अब लगभग 80 परिवार हो गई है। इन सभी परिवारों के समुचित पुनर्वास के लिए लगभग 12 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई।
पुनर्वास के लिए मौजा-धोबनी, मौजा-भाटिन और मौजा-बेनासोल को विकल्प के रूप में चिन्हित किया गया है। हालांकि कुछ आपत्तियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण अब तक विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मौजा-धोबनी में कुल 45 विस्थापित परिवारों को प्रति परिवार 12 डिसमिल भूमि आवंटित किए जाने का प्रस्ताव है।
अनुमंडल पदाधिकारी अर्णव मिश्रा ने बैठक में मौजूद सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि पुनर्वास कार्य में आ रही समस्याओं को स्पष्ट रूप से साझा किया जाए और आपसी समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि पुनर्वास कार्य में किसी भी प्रकार की देरी से प्रभावित परिवारों को परेशानी होती है, इसलिए सभी विभाग मिलकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।
एसडीओ ने यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिया कि पुनर्वास परियोजना का प्रारूप और प्राक्कलन जल्द तैयार कर प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पुनर्वास योजना तैयार करते समय विस्थापित परिवारों की मूलभूत जरूरतों जैसे सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाओं को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने स्थानीय प्रशासन और यूसीआईएल के अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों की जायज मांगों, जरूरतों और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आपसी समन्वय के साथ पुनर्वास प्रक्रिया को शीघ्र और संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जाए। प्रशासन का प्रयास है कि प्रभावित परिवारों को समय पर उचित पुनर्वास मिले और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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