टीएमएच में एडवांस न्यूरोवैस्कुलर केयर पर सीएमई का सफल आयोजन

Jamshedpur News: जमशेदपुर के प्रतिष्ठित टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) ने आधुनिक चिकित्सा सेवाओं को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए एडवांस न्यूरोवैस्कुलर केयर विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम और व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन किया। 18 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम का विषय "न्यूरोवैस्कुलर विकारों का एंडोवैस्कुलर प्रबंधन: एक व्यावहारिक दृष्टिकोण" रहा। कार्यक्रम में विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं से जुड़े डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लेकर न्यूरोवैस्कुलर रोगों के उपचार में हो रही नवीनतम प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। इस आयोजन का उद्देश्य चिकित्सकों को आधुनिक एंडोवैस्कुलर तकनीकों से अवगत कराना तथा मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाना था।

वरिष्ठ चिकित्सकों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम का उद्घाटन

सीएमई कार्यक्रम का उद्घाटन टाटा मेन हॉस्पिटल की जनरल मैनेजर (मेडिकल सर्विसेज) डॉ. विनिता सिंह ने किया। इस अवसर पर अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में चीफ ऑफ मेडिकल इनडोर सर्विसेज डॉ. अशोक सुंदर, चीफ ऑफ मेडिकल सपोर्ट सर्विसेज डॉ. ममता रथ दत्ता तथा न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. जीवेश मल्लिक सहित विभिन्न विभागों के हेड, कंसल्टेंट, फैकल्टी सदस्य और स्वास्थ्य पेशेवर शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान तेजी से बदल रहा है और ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम डॉक्टरों को नई तकनीकों से अपडेट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने और मरीजों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया।

डॉ. पीयूष तोमर ने बताईं एंडोवैस्कुलर उपचार की आधुनिक तकनीकें

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नई दिल्ली के प्रसिद्ध न्यूरो-इंटरवेंशनिस्ट डॉ. पीयूष तोमर रहे। उन्होंने संवादात्मक व्याख्यानों और व्यावहारिक प्रस्तुतियों के माध्यम से एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशन की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि न्यूरोवैस्कुलर रोगों के उपचार में मिनिमली इनवेसिव तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है, जिससे मरीजों को कम दर्द, कम जटिलताएं और तेजी से रिकवरी का लाभ मिलता है। विशेषज्ञों ने इंट्राक्रैनियल एन्यूरिज्म, एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक, आर्टेरियोवेनस मैलफॉर्मेशन (एवीएम) तथा ड्यूरल एवं स्पाइनल आर्टेरियोवेनस फिस्टुला (एवीएफ) जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में एंडोवैस्कुलर इंटरवेंशन की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही शीघ्र निदान, समय पर रेफरल, बहु-विषयक सहयोग और साक्ष्य-आधारित उपचार प्रणाली को बेहतर परिणामों की कुंजी बताया गया।

व्यावहारिक कार्यशाला में डॉक्टरों ने सीखी आधुनिक प्रक्रियाएं

सीएमई के साथ आयोजित व्यावहारिक कार्यशाला इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। इसमें प्रतिभागियों को आधुनिक एंडोवैस्कुलर उपकरणों, कैथेटर, गाइडवायर और अन्य इंटरवेंशनल तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में डॉक्टरों ने सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से प्रक्रिया की योजना, उपकरणों के सुरक्षित संचालन और जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने की तकनीकों को समझा। इस प्रशिक्षण से प्रतिभागियों को आधुनिक न्यूरो-इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी मिली, जिससे भविष्य में मरीजों को अधिक प्रभावी और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें कई जटिल चिकित्सकीय मामलों पर चर्चा की गई।

70 से अधिक डॉक्टरों ने लिया हिस्सा, चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया आयाम

इस शैक्षणिक कार्यक्रम में चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सीएमई में 70 से अधिक डॉक्टर शामिल हुए, जबकि व्यावहारिक कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञताओं के 40 डॉक्टरों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन चिकित्सकों के ज्ञान और कौशल को लगातार बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टाटा मेन हॉस्पिटल ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा ताकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़े और मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। अस्पताल निकट भविष्य में एडवांस एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं की शुरुआत की दिशा में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इससे न केवल जमशेदपुर बल्कि पूरे झारखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों को अत्याधुनिक न्यूरोवैस्कुलर उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने की उम्मीद है। ऐसे प्रयास टीएमएच को पूर्वी भारत के प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थानों में और अधिक मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।