करनडीह ग्रामसभा ने प्रशासन को सौंपा मांग पत्र
Jamshedpur News: जमशेदपुर के परसुडीह क्षेत्र स्थित करनडीह ग्रामसभा ने बहुमंजिला इमारतों से निकलने वाले दूषित पानी के कारण खेती योग्य जमीन को हो रहे नुकसान पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामसभा के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को एक मांग पत्र सौंपकर जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। ग्रामसभा का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा और क्षेत्र में सामाजिक तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
गौरी भवन से करनडीह फाटक तक बह रहा गंदा पानी
ग्रामसभा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि परसुडीह के गौरी भवन क्षेत्र से लेकर करनडीह फाटक तक बने कई बहुमंजिला अपार्टमेंट और आवासीय परिसरों का गंदा और दूषित पानी सीधे लाइनटोला मुख्य सड़क पर बह रहा है। इन इमारतों में रहने वाले लोगों द्वारा निकाला जा रहा घरेलू अपशिष्ट जल बिना किसी उचित निकासी व्यवस्था के खुले तौर पर छोड़ा जा रहा है। इससे न केवल सड़क पर जलजमाव की स्थिति बन रही है, बल्कि यह पानी धीरे-धीरे आसपास के कृषि क्षेत्रों में भी पहुंच रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन प्रबंधन द्वारा सीवरेज सिस्टम की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके कारण पूरा बोझ ग्रामीण इलाकों और किसानों को झेलना पड़ रहा है।
खेतों की उर्वरता हो रही खत्म, किसानों की बढ़ी चिंता
ग्रामसभा के अनुसार बहुमंजिला इमारतों से निकलने वाला दूषित पानी सीधे खेतों में पहुंच रहा है, जिससे खेती योग्य जमीन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। खेतों में जमा हो रहे गंदे पानी के साथ प्लास्टिक, पॉलिथीन और अन्य कूड़ा-कचरा भी पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि लगातार दूषित पानी के संपर्क में रहने से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है। इससे आने वाले कृषि सीजन में फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। कई किसानों के खेतों में कचरे का ढेर जमा हो गया है, जिससे खेतों की सफाई और खेती की तैयारी में अतिरिक्त समय और खर्च लग रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कृषि कार्य करना मुश्किल हो जाएगा और किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
ग्रामसभा की बैठक में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय
इस गंभीर समस्या को लेकर हाल ही में लाइनटोला क्षेत्र में करनडीह ग्रामसभा की विशेष बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और किसानों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव की मुख्य सड़क और खेतों में अब किसी भी कीमत पर दूषित पानी बहने नहीं दिया जाएगा। ग्रामसभा ने यह भी तय किया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन और संबंधित भवन प्रबंधन समितियों पर दबाव बनाया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि विकास के नाम पर गांवों और किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
बहुमंजिला इमारतों को सीवरेज सिस्टम बनाने का निर्देश देने की मांग
ग्रामसभा के माझी बाबा सलखू सोरेन ने बताया कि प्रशासन से यह मांग की गई है कि क्षेत्र की सभी बहुमंजिला इमारतों के अध्यक्षों और सचिवों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। उन्हें अपने स्तर पर आधुनिक और वैज्ञानिक सीवरेज सिस्टम विकसित करने तथा गंदे पानी के निस्तारण की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बाध्य किया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्येक भवन में उचित सीवरेज प्रबंधन नहीं होगा, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (एसटीपी) या अन्य पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का उपयोग कर गंदे पानी का निस्तारण किया जाए।
खेती के मौसम से पहले समाधान की मांग
माझी बाबा सलखू सोरेन ने कहा कि वर्तमान समय खेती-किसानी की तैयारियों का है। मानसून की शुरुआत के साथ ही किसान अपने खेतों में बुवाई और अन्य कृषि कार्य शुरू करेंगे। ऐसे में यदि खेतों में दूषित पानी और कचरा जमा रहा तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है और इसकी सुरक्षा प्रशासन की भी जिम्मेदारी है।
विवाद की आशंका, प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की अपील
ग्रामसभा ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों और ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने खेतों और प्राकृतिक संसाधनों को किसी भी कीमत पर नुकसान नहीं होने देंगे।
मांग पत्र सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में माझी बाबा सलखू सोरेन, सिंगराई मुर्मू, रघुनाथ हांसदा, बंगाल मार्डी, लेचा मुर्मू, शंकर हेंब्रम, मुखिया सरस्वती टुडू, मुखिया सिनी सोरेन सहित कई ग्रामीण शामिल थे। सभी ने जिला प्रशासन से अविलंब हस्तक्षेप कर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो सके और क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे।
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