Jamshedpur News: जमशेदपुर में विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े जागरूक नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को लेकर उपायुक्त को राष्ट्रपति के नाम एक मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने देश में बढ़ती असहिष्णुता, नागरिक अधिकारों पर हो रहे कथित हमलों और सामाजिक सौहार्द को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिक स्वतंत्रता, समानता और न्याय के सिद्धांतों की रक्षा करना बेहद जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार तक अपनी मांगों और चिंताओं को पहुंचाने की अपील की।

प्रो. गर्ग चट्टोपाध्याय की गिरफ्तारी की निष्पक्ष जांच की मांग
सौंपे गए मांग पत्र में प्रतिनिधिमंडल ने प्रो. गर्ग चट्टोपाध्याय की गिरफ्तारी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधियों ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना था कि किसी भी नागरिक के खिलाफ कार्रवाई कानून और संविधान के दायरे में होनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैचारिक असहमति का सम्मान आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति पर आरोप हैं तो उसकी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

जननायकों की प्रतिमाओं के सम्मान की उठी मांग
मांग पत्र में जननायकों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के अपमान की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि देश के महान नेताओं, समाज सुधारकों और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं समाज की प्रेरणा हैं और उनका सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं तथा दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना था कि महापुरुषों के सम्मान से ही सामाजिक एकता और सकारात्मक वातावरण कायम रह सकता है।

बुलडोजर संस्कृति समाप्त करने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मांग पत्र में तथाकथित “बुलडोजर संस्कृति” पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई में संवैधानिक प्रक्रिया और न्यायिक व्यवस्था का पालन होना चाहिए। बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी के घर या संपत्ति पर कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ मानी जा सकती है। प्रतिनिधियों ने कहा कि कानून का शासन ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न्यायसंगत और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की अपील की।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता पर जोर
मांग पत्र में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए, तभी देश में भाईचारा और शांति कायम रह सकती है। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। प्रतिनिधियों का कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि रहे उपस्थित
इस प्रतिनिधिमंडल में कई सामाजिक, सांस्कृतिक और जनसंगठनों के सदस्य शामिल थे। इप्टा, झारखंड कौमी एकता मंच तथा अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि नागरिक स्वतंत्रताओं, लोकतांत्रिक अधिकारों और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रतिनिधिमंडल में गौतम कुमार बोस, अर्पिता, मो. निजाम, नासिर खान, रमेश मुखी, प्रो. असलम मलिक, राजकुमार दास, जितेंद्र यादव और गणेश राम सहित कई लोग उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प व्यक्त किया।