पेसा कानून 1996 के तहत विशेष ग्राम सभा का निर्देश। 18 मई को नामोटोला में होगा विशेष ग्रामसभा। इसमें सभी गांव के ग्रामीण शामिल होंगे।
Jamshedpur News: झारखंड सरकार के पंचायत राज विभाग द्वारा पेसा कानून 1996 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में विशेष ग्राम सभा आयोजित करने का निर्देश जारी किया गया है। निदेशक पंचायत राज विभाग, झारखंड सरकार के आदेश संख्या 804 के अनुसार प्रत्येक ग्राम सभा के संचालन के लिए बैंक खाता खोलने, सहायक सचिव के चयन तथा ग्राम सभा के कार्यालय हेतु सरकारी भवन या पंचायत भवन के उपयोग संबंधी प्रस्ताव पारित करने को कहा गया है। इसी क्रम में जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत द हलुदबनी ग्राम पंचायत में भी आगामी 18 मई 2026 को नामोटोला स्थित पंचायत मुख्यालय में विशेष ग्राम सभा आयोजित करने की तैयारी की गई है।

परंपरागत प्रतिनिधियों को सूचना नहीं देने का आरोप
ग्राम सभा आयोजन को लेकर स्थानीय आदिवासी समाज के लोगों ने गंभीर आपत्ति जताई है। आरोप लगाया गया है कि पंचायत की मुखिया और पंचायत सचिव ने नामोटोला के परंपरागत हातु मुंडा, दिवरी तथा डाकुआ को बिना सूचना दिए ही ग्राम सभा आयोजित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आदिवासी समाज के जानकारों का कहना है कि यह कदम पेसा कानून 1996 और पेसा नियमावली 2026 का खुला उल्लंघन है। उनका कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की वैधानिकता तभी मानी जाएगी जब पारंपरिक ग्राम प्रधानों और सामाजिक प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित हो।

पेसा नियमावली 2026 का हवाला
आदिवासी स्वशासन व्यवस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि झारखंड सरकार द्वारा अधिसूचित पेसा नियमावली 2026 के अनुसार ग्राम सभा का संचालन परंपरागत सामाजिक संरचना के आधार पर होना चाहिए। नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि ग्राम सभा की बैठक हातु मुंडा, डाकुआ और दिवरी जैसे पारंपरिक पदाधिकारियों की उपस्थिति और सहमति से आयोजित की जाएगी। उनका आरोप है कि निर्वाचित मुखिया या पंचायत सचिव अपने स्तर से मनमाने तरीके से ग्राम सभा आयोजित नहीं कर सकते। इससे आदिवासी परंपरा और ग्राम स्वशासन की मूल भावना प्रभावित होती है।

ग्राम सभा की अधिसूचना और सीमांकन की मांग
आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि किसी भी ग्राम सभा के आयोजन से पहले जिला प्रशासन प्रत्येक पारंपरिक ग्राम सभा को जिला गजट में अधिसूचित करे। साथ ही ग्राम सभा की चौहद्दी, सीमांकन और संबंधित परंपरागत जनजातीय प्रतिनिधियों के नाम भी प्रकाशित किए जाएं। उनका कहना है कि जब तक ग्राम सभा की वैधानिक पहचान और पारंपरिक संरचना को प्रशासनिक मान्यता नहीं मिलेगी, तब तक पेसा कानून का सही तरीके से पालन संभव नहीं है। इसके बाद ही पंचायत सचिव और मुखिया को ग्राम सभा संचालन का अधिकार दिया जाना चाहिए।

जिला प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के जानकारों का आरोप है कि पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन देकर इस विषय में अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनका कहना है कि बार-बार लिखित शिकायत और सुझाव देने के बावजूद जिला प्रशासन ने सभी प्रखंडों और अंचलों को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ग्राम सभा कराने का निर्देश जारी कर दिया। इससे पंचायत प्रतिनिधियों को मनमानी करने का अवसर मिल गया है और आदिवासी परंपराओं की अनदेखी हो रही है।

विभागीय मंत्री और पंचायत राज विभाग पर उठे सवाल
इस पूरे मामले को लेकर आदिवासी समाज के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों ने पंचायत राज विभाग और विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि पेसा कानून और पेसा नियमावली को सही तरीके से लागू नहीं किया गया तो अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी स्वशासन व्यवस्था कमजोर हो जाएगी। समाज के लोगों ने सरकार से मांग की है कि ग्राम सभाओं के संचालन में पारंपरिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए तथा पेसा कानून की मूल भावना के अनुरूप प्रशासनिक निर्देश जारी किए जाएं।