Jamshedpur news: पूर्वी सिंहभूम जिले के गोलमुरी-सह-जुगसलाई प्रखंड अंतर्गत केरूआडूंगरी पंचायत के तालसा गांव में महिलाओं एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू की पहल एवं अबीरा संस्था के सहयोग से 30 दिवसीय “सोरा प्रिंटिंग ट्रेनिंग” कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं एवं युवाओं को कौशल विकास से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

महिलाओं एवं युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर
सोरा प्रिंटिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के लिए रोजगारोन्मुखी पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रिंटिंग कला एवं डिजाइनिंग की बुनियादी जानकारी दी जाएगी, जिससे वे भविष्य में स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें। पंचायत स्तर पर इस प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रशिक्षण में लगभग 50 महिलाओं एवं युवाओं ने भाग लिया है। प्रथम स्तर के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि 30 दिन निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक एवं तकनीकी दोनों प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे प्रशिक्षण के बाद इस कला को आय के साधन के रूप में विकसित कर सकें।

प्रशिक्षण सामग्री का किया गया वितरण
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मुखिया कान्हू मुर्मू ने सभी प्रशिक्षणार्थियों के बीच कॉपी, पेंसिल, रबर, कटर एवं अन्य आवश्यक प्रशिक्षण सामग्री का वितरण किया। प्रशिक्षण सामग्री मिलने से प्रतिभागियों में उत्साह देखा गया।
मुखिया ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल सही मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण की है। पंचायत का प्रयास है कि महिलाएं एवं युवा अपने कौशल के बल पर आर्थिक रूप से सशक्त बनें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ें।

गांव के लोगों ने पहल की सराहना की
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम गांवों में नई सोच और नई दिशा प्रदान करते हैं। महिलाओं ने कहा कि इससे उन्हें घर बैठे रोजगार के अवसर मिल सकते हैं और वे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में योगदान दे सकेंगी। ग्रामीणों का मानना है कि यदि पंचायत स्तर पर लगातार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होते रहें, तो गांव के युवाओं का पलायन भी कम होगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।

कई पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण थे मौजूद 
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर नायके बाबा हबीराम मुर्मू, ट्रेनर सोनाराम सोरेन, वार्ड सदस्य लक्ष्मी हेंब्रम तथा TSF Fellow सिदलाल टुडू सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस पहल को ग्रामीण विकास की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को पूरी लगन एवं अनुशासन के साथ प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे भविष्य में इस कौशल का बेहतर उपयोग कर सकें।

पंचायत स्तर पर कौशल विकास को मिल रहा बढ़ावा
केरूआडूंगरी पंचायत में लगातार कौशल विकास एवं स्वरोजगार से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण आधारित योजनाएं सबसे प्रभावी माध्यम हैं। मुखिया कान्हू मुर्मू ने कहा कि पंचायत आगे भी इसी प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी, ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से समाज एवं गांव दोनों का विकास संभव है।