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हजारीबाग कांड पर जमशेदपुर में उबाल: झामुमो ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, आरोपी भाजपा नेता को फांसी देने की मांग

 जमशेदपुर: झारखंड के हजारीबाग जिले में एक 13 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और उसकी हत्या के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य अपराध के विरोध में और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर जमशेदपुर की राजनीति भी गरमा गई है। शुक्रवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्वी सिंहभूम जिला संयोजक प्रमुख बाघराय मार्डी के नेतृत्व में एक विशाल प्रतिनिधिमंडल ने जमशेदपुर उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा।प्रतिनिधिमंडल में शेख बदरुद्दीन, प्रमोद लाल, बाघराय मार्डी, लालटू महतो, फैयाज खान, विद्यासागर दास, गुरमीत सिंह गिल, विनोद दे, संदीप चक्रवर्ती, डी राकेश राव, अभय पांडेय, उमाकांत झा, सपन राय, कृष्ण कुमार गुप्ता, इंद्रपाल सिंह, हरपाल सिंह, चंदनलाल, उमाकांत, उमेश गिरी, मनजीत सिंह, हरदेव सिंह, प्रभात सिंह, सुखलाल टुडू, विष्णु नाग, राकेश गुप्ता, लखाई बास्के, सुभाष मित्तल, परमजीत सिंह आदि उपस्थित थे.




फास्ट ट्रैक कोर्ट और फांसी की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से सरकार और प्रशासन से यह पुरजोर मांग की है कि हजारीबाग की घटना में शामिल आरोपी, जो कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़ा नेता बताया जा रहा है, के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए। झामुमो कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील और गंभीर है, इसलिए इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (त्वरित न्यायालय) में होनी चाहिए। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि ऐसे दरिंदे को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है और उसे जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जानी चाहिए। बाघराय मार्डी ने कहा कि जब तक दोषी को मौत की सजा नहीं मिलती, तब तक पीड़ित आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।



विपक्ष पर तीखा हमला और राजनीतिक घेराबंदी

इस दौरान आंदोलनकारी नेता प्रमोद लाल ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा के नेता राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं और जनता को गुमराह करने के लिए आंदोलन करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके अपने ही लोग इस तरह के घिनौने और शर्मनाक कृत्यों में संलिप्त पाए जा रहे हैं। प्रमोद लाल ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए सरकार को बदनाम करने का प्रयास करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उनके अपने कार्यकर्ताओं का चरित्र उजागर हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व इस घटना पर चुप्पी तोड़ेगा?

बेटियों की सुरक्षा और झामुमो का रुख

झामुमो ने अपने ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार और प्रशासन को यह संदेश दिया है कि बेटियों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। झामुमो नेताओं ने चेतावनी दी कि चाहे अपराधी कितना भी रसूखदार क्यों न हो या किसी भी शक्तिशाली राजनीतिक दल से क्यों न जुड़ा हो, उसे कानून के शिकंजे से बचने नहीं दिया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार महिलाओं और बच्चियों के सम्मान के प्रति प्रतिबद्ध है और इस मामले में पुलिस प्रशासन को पूरी छूट दी जानी चाहिए ताकि जांच निष्पक्ष और त्वरित हो सके।

सामाजिक रोष और प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी

उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता और स्थानीय नेता मौजूद थे। सभी के चेहरों पर घटना को लेकर गहरा आक्रोश था। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि समाज में इस तरह की विकृति को पनपने नहीं दिया जाएगा। इस ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से शेख बदरुद्दीन, प्रमोद लाल, बाघराय मार्डी, लालटू महतो, फैयाज खान, विद्यासागर दास, गुरमीत सिंह गिल, विनोद दे, संदीप चक्रवर्ती, डी राकेश राव, अभय पांडेय, उमाकांत झा, सपन राय, कृष्ण कुमार गुप्ता, इंद्रपाल सिंह, हरपाल सिंह, चंदनलाल, उमाकांत, उमेश गिरी, मनजीत सिंह, हरदेव सिंह, प्रभात सिंह, सुखलाल टुडू, विष्णु नाग, राकेश गुप्ता, लखाई बास्के, सुभाष मित्तल और परमजीत सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे।

त्वरित न्याय और प्रशासन को अल्टीमेटम

अंत में, झामुमो ने जिला प्रशासन के माध्यम से यह सुनिश्चित करने को कहा कि हजारीबाग पुलिस इस मामले के सभी साक्ष्यों को मजबूती से कोर्ट में पेश करे। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए और उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता व न्याय का भरोसा दिलाया जाए। कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इस मामले में ढिलाई बरती गई या राजनीतिक दबाव के कारण दोषी को बचाने का प्रयास हुआ, तो झामुमो पूरे राज्य में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। जमशेदपुर के कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे इस लड़ाई को तब तक जारी रखेंगे जब तक कि उस मासूम बच्ची को इंसाफ नहीं मिल जाता।

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