मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि झारखंड के मजदूरों को देश में सबसे कम मजदूरी मिलती है, जो चिंता का विषय है। राज्य सरकार मजदूरी बढ़ाने के प्रयास कर रही है, लेकिन केंद्र की ओर से इसमें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने बढ़ती महंगाई का जिक्र करते हुए कहा कि रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। खासकर रसोई गैस की बढ़ती कीमत और किल्लत ने गरीब और मध्यम वर्ग के सामने नई परेशानियां खड़ी कर दी हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह अपनी जिम्मेदारियों को राज्यों पर थोपने का प्रयास कर रही है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने में केंद्र सरकार पूरी तरह सफल नहीं दिख रही है, जिसका असर राज्यों पर भी पड़ रहा है।
वहीं, विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण संकल्प पारित किया गया। ग्रामीण विकास मंत्री Deepika Pandey Singh ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया, जिसमें मनरेगा योजना को जारी रखने की बात कही गई। इस संकल्प में यह भी मांग की गई कि मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों के रोजगार को बढ़ाकर 150 दिन किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें।
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना है, जिससे पलायन जैसी गंभीर समस्या को रोका जा सके। राज्य सरकार का मानना है कि यदि रोजगार के दिन बढ़ाए जाते हैं, तो इससे गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और उन्हें शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। विधानसभा से पारित इस प्रस्ताव को अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, ताकि इस पर सकारात्मक निर्णय लिया जा सके। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस दिशा में गंभीरता से विचार करेगी और राज्य के हित में आवश्यक कदम उठाएगी।
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