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जमशेदपुर में जल संकट गहराया: सोलर मिनी जलमीनार बदहाल, गोविंदपुर जलापूर्ति योजना ठप

जमशेदपुर: जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत विभिन्न पंचायतों में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए सोलर मिनी जलमीनार, जो कभी लोगों के लिए राहत का माध्यम थे, आज बदहाल स्थिति में हैं। रखरखाव के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण अधिकांश जलमीनार या तो खराब हो चुके हैं या फिर पूरी तरह बंद पड़े हैं। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

रखरखाव के अभाव में खराब पड़े सोलर जलमीनार

सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या दूर करने के उद्देश्य से सोलर मिनी जलमीनार लगाए गए थे, लेकिन आज इनकी स्थिति काफी खराब हो चुकी है। कई स्थानों पर ये जलमीनार तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं, जबकि कुछ में मामूली मरम्मत से ही इन्हें दोबारा चालू किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर इनका रखरखाव किया जाता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। जलमीनारों के खराब होने से ग्रामीणों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों पर उठ रहे सवाल, धरातल पर काम नहीं
इस मुद्दे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कई मुखिया अपने राजनीतिक हितों में अधिक व्यस्त हैं और जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं हैं। लोगों का कहना है कि जलमीनारों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी पंचायत स्तर पर ही होती है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं में आम जनता की बुनियादी जरूरतें पीछे छूटती जा रही हैं।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी समस्या

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि प्रशासन ने जलमीनारों के रखरखाव की जिम्मेदारी मुखियाओं को सौंपकर खुद को अलग कर लिया है। प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और जवाबदेही की कमी के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यदि प्रशासन समय-समय पर इन योजनाओं की समीक्षा करता और जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता, तो शायद आज हालात इतने खराब नहीं होते। लेकिन मौजूदा स्थिति में न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है और न ही खराब पड़े जलमीनारों को दुरुस्त करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

गोविंदपुर जलापूर्ति योजना भी बनी परेशानी का कारण

ग्रामीणों की परेशानियों को और बढ़ाने का काम गोविंदपुर जलापूर्ति योजना ने किया है, जो अक्सर किसी न किसी कारण से ठप रहती है। इस योजना से जुड़े क्षेत्रों के लोग लंबे समय से नियमित जलापूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं।
जब जलापूर्ति योजना बंद रहती है और जलमीनार भी काम नहीं करते, तब लोगों के पास कोई विकल्प नहीं बचता। ऐसे में उन्हें निजी साधनों या दूरस्थ स्रोतों पर निर्भर होना पड़ता है, जिससे उनका समय और संसाधन दोनों खर्च होते हैं।

सार्वजनिक जलमीनारों पर कब्जा, लोग विरोध करने से डरते

छोटा गोविंदपुर क्षेत्र में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां कुछ दबंग लोगों द्वारा सार्वजनिक सोलर जलमीनारों पर कब्जा कर लिया गया है। ये जलमीनार, जो आम जनता के उपयोग के लिए बनाए गए थे, अब सीमित लोगों तक ही सिमट कर रह गए हैं।स्थानीय लोग इस स्थिति से नाराज तो हैं, लेकिन दबंगों के डर से खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। इससे सामाजिक असमानता और बढ़ रही है और जरूरतमंद लोग पानी जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हो रहे हैं।
जरूरत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अवैध कब्जों को हटाए और जलमीनारों को आम जनता के उपयोग के लिए सुनिश्चित करे। साथ ही, खराब पड़े जलमीनारों की मरम्मत और गोविंदपुर जलापूर्ति योजना को नियमित रूप से चालू रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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