समिति ने स्पष्ट तौर पर कहा कि न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर एक “सम्मानजनक स्तर” तक ले जाना जरूरी है, ताकि सेवानिवृत्त श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। यह सिफारिश ऐसे समय में आई है जब देशभर के लाखों पेंशनधारक लंबे समय से न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं। पेंशनभोगियों का कहना है कि 1,000 रुपये में वर्तमान समय में बुनियादी जरूरतें भी पूरी करना संभव नहीं है।
इसी मुद्दे को लेकर हाल ही में पेंशनधारकों ने राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन भी किया था, जो 9 मार्च से शुरू हुआ था। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और सरकार से अपनी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने वर्षों तक सेवा दी है, लेकिन अब उन्हें पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही है।
संसदीय समिति ने अपने सुझाव में यह भी कहा है कि सरकार को इस योजना के लिए बजटीय सहायता बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि पेंशनधारकों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप उचित पेंशन मिल सके। समिति का मानना है कि अतिरिक्त बजटीय सहयोग से योजना को मजबूत किया जा सकता है और इससे लाखों पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, समिति ने एक स्थायी समन्वय एवं संवाद बोर्ड के गठन की भी सिफारिश की है। इस बोर्ड का उद्देश्य पेंशनधारकों, सरकार और संबंधित विभागों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह के मुद्दों का समाधान समय पर और प्रभावी तरीके से किया जा सके।
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