जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत बनकाटा गांव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब गांव के लोग जागरूक होते हैं, तो विकास की राह खुद बन जाती है। पेसा (PESA) नियमावली के तहत आयोजित ग्राम सभा की बैठक न केवल एक औपचारिक प्रक्रिया थी, बल्कि यह गांव के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक सशक्त कदम भी साबित हुई। झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस बैठक में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। खास बात यह रही कि बैठक में महिला और पुरुष दोनों की बराबर उपस्थिति रही, जो गांव में बढ़ती जागरूकता और समान भागीदारी का संकेत देती है। यह ग्राम सभा केवल निर्णय लेने का मंच नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए अपनी आवाज उठाने, अपने अधिकार समझने और गांव के विकास की दिशा तय करने का माध्यम भी बनी।

सर्वसम्मति से नेतृत्व का चयन, एकजुटता की मिसाल


ग्राम सभा की सबसे बड़ी खासियत रही कि सभी पदों का चयन सर्वसम्मति से किया गया। बाघराय सोरेन को अध्यक्ष, विपिन कुमार सिंह को सहायक सचिव और श्रीमती सुलोचना सिंह को कोषाध्यक्ष के रूप में चुना गया। इस चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार का विवाद नहीं हुआ, बल्कि सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने प्रतिनिधियों पर भरोसा जताया। यह गांव की सामाजिक एकता और आपसी विश्वास को दर्शाता है। महिला प्रतिनिधि के रूप में सुलोचना सिंह को कोषाध्यक्ष बनाया जाना इस बात का संकेत है कि गांव में महिलाओं की भूमिका अब केवल सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे नेतृत्व में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। यह सामूहिक निर्णय प्रक्रिया लोकतंत्र की असली भावना को दर्शाती है, जहां हर व्यक्ति की आवाज को महत्व दिया जाता है।

पांच प्रस्तावों ने तय की विकास की दिशा


 बैठक के दौरान पारित पांच महत्वपूर्ण प्रस्तावों ने बनकाटा गांव के विकास की ठोस नींव रख दी। पहले प्रस्ताव के तहत सहायक सचिव के रूप में विपिन कुमार सिंह की औपचारिक नियुक्ति की पुष्टि की गई। दूसरे प्रस्ताव में ग्राम सभा के लिए बैंक ऑफ इंडिया में खाता खोलने का निर्णय लिया गया, जिससे वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। तीसरे प्रस्ताव के तहत ग्राम सभा कार्यालय के लिए पंचायत भवन के ऊपरी तल्ले का चयन किया गया, जिससे कार्य संचालन के लिए एक स्थायी स्थान सुनिश्चित हो गया। चौथे प्रस्ताव में यह तय किया गया कि ग्राम सभा के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होगी। पांचवें प्रस्ताव में दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था तय की गई, जो प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में मदद करेगा।

स्थानीय संसाधनों पर ग्राम सभा का अधिकार


 ग्राम सभा का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय रहा लघु खनिज यानी बालू के खनन और प्रबंधन का अधिकार स्वयं ग्राम सभा द्वारा करने का फैसला। पेसा नियमावली के तहत यह अधिकार ग्राम सभा को दिया गया है, और बनकाटा गांव ने इसका सही उपयोग करते हुए स्थानीय संसाधनों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस निर्णय से न केवल गांव को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि अवैध खनन पर भी रोक लगेगी। साथ ही यह सुनिश्चित होगा कि संसाधनों का उपयोग गांव के विकास के लिए ही किया जाए।
यह कदम आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत प्रयास है, जिससे गांव की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

सशक्त ग्राम सभा से मजबूत होगा गांव का भविष्य

 
इस ग्राम सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि बनकाटा गांव अब जागरूक और संगठित हो चुका है। माझी बाबा बाघराय सोरेन, विपिन कुमार सिंह, लाबय सोरेन, बिरसिंह सोरेन, पूजा सिंह, मीना सिंह, रीना मार्डी, जलो सिंह, सोनली सिंह, शिवानी सिंह, उर्मिन सिंह सहित कई ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
ग्राम सभा के माध्यम से गांव में पारदर्शी प्रशासन, सामूहिक निर्णय और स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक मजबूत संदेश गया है। यह पहल न केवल बनकाटा गांव के लिए, बल्कि आसपास के अन्य गांवों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है। यदि इसी तरह से गांव के लोग एकजुट होकर निर्णय लेते रहें, तो वह दिन दूर नहीं जब बनकाटा आत्मनिर्भर और विकसित गांवों की सूची में शामिल होगा। यह कहानी बताती है कि विकास के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी है जागरूकता, एकता और सही दिशा में उठाए गए