बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण और आवास विकास
बैठक के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्रों, बहुउद्देशीय भवनों और छात्रावासों के निर्माण कार्य की प्रगति जांची। इसके साथ ही, सुदूर ग्रामीण इलाकों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सड़क संपर्क पथ, विद्युतीकरण और 'नल से जल' योजना के तहत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने के निर्देश दिए गए। बेघर परिवारों के लिए 'बिरसा आवास' और 'ग्रामीण आवास' योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है ताकि जनजातीय परिवारों का जीवन स्तर सुधरे।
शिक्षा और छात्र कल्याण पर विशेष ध्यान
जनजातीय छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने प्री व पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के वितरण में तेजी लाने और पात्र छात्रों को समय पर साइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि कोई भी योग्य छात्र तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से सरकारी लाभ से वंचित न रहे। शिक्षा के क्षेत्र में यह निवेश आने वाले समय में जनजातीय समाज के सशक्तिकरण का आधार बनेगा।
रोजगार सृजन और आर्थिक स्वावलंबन
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मत्स्य विभाग की योजनाओं और 'मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना' की समीक्षा की गई। मत्स्य पालन से जुड़े लाभुकों को मिलने वाली वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन पर चर्चा हुई ताकि स्वरोजगार के अवसर बढ़ें। इसके अतिरिक्त, वनाधिकार पट्टा वितरण की स्थिति का जायजा लिया गया, जो जनजातीय समुदायों के आर्थिक और भूमि अधिकारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्यटन संवर्धन के तहत स्थानीय पर्यटन स्थलों के विकास की योजना भी बनाई गई है ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुल सकें।
विधिक सेवा शिविर और राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन
सिदगोड़ा टाउन हॉल में राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर और राष्ट्रीय लोक अदालत का गरिमामय आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद द्वारा किया गया।
आयोजन की मुख्य झलकियाँ
इस अवसर पर न्यायिक और प्रशासनिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें माननीय न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविन्द कुमार पांडेय, उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी और ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग शामिल थे।
सांस्कृतिक वृत: कार्यक्रम का शुभारंभ कस्तूरबा विद्यालय की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत सुमधुर स्वागत गान से हुआ।
जागरूकता प्रसार: सूचना और तकनीक के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के लिए एलईडी स्क्रीन पर नालसा (NALSA) गीत और लीगल ऐड क्लीनिक पर आधारित एक ज्ञानवर्धक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई।
प्रदर्शनी का अवलोकन: मंचीय कार्यक्रम के समापन के पश्चात, अतिथियों ने जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भ्रमण किया। इस प्रदर्शनी में सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और स्थानीय विशिष्ट उत्पादों का सजीव प्रदर्शन किया गया था।
न्याय और सशक्तिकरण का संगम
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि इस शिविर का उद्देश्य केवल वादों का निपटारा करना नहीं, बल्कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करना और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक सुलभ कराना है। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने भी दोहराया कि न्याय और विकास एक-दूसरे से जुड़े हैं। जब समाज का कमजोर वर्ग जागरूक होगा, तभी वास्तविक सशक्तिकरण संभव है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जो एकता और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध का प्रतीक रहा।
1.42 करोड़ राशि का परिसम्पति लाभुकों के बीच वितरित
बीमा दावों का त्वरित भुगतान और राहत
न्यायिक ट्रिब्यूनल के निर्णयों के आधार पर सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के आश्रितों को बड़ी राहत प्रदान की गई। विभिन्न बीमा कंपनियों के माध्यम से कुल मिलाकर एक बड़ी राशि के चेक वितरित किए गए। इसमें प्रमुख रूप से श्रीमती जयंती व सुचिता प्रधान को 70 लाख रुपये, महेंद्र कुमार राम को 34.02 लाख रुपये और लालती देवी को 31.34 लाख रुपये समेत अन्य परिवारों को उनके दावों का भुगतान किया गया, जिससे पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल मिला।
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