Jamshedpur News: जिला उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक कर जनजातीय विकास की दिशा में चल रही योजनाओं की सघन समीक्षा की। इस बैठक का मुख्य केंद्र प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान रहा। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं का प्राथमिक उद्देश्य अनुसूचित जनजाति और विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों (PVTG) का सर्वांगीण विकास करना है। प्रशासन का लक्ष्य केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारकर अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाना है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।

बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण और आवास विकास

बैठक के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्रों, बहुउद्देशीय भवनों और छात्रावासों के निर्माण कार्य की प्रगति जांची। इसके साथ ही, सुदूर ग्रामीण इलाकों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सड़क संपर्क पथ, विद्युतीकरण और 'नल से जल' योजना के तहत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने के निर्देश दिए गए। बेघर परिवारों के लिए 'बिरसा आवास' और 'ग्रामीण आवास' योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है ताकि जनजातीय परिवारों का जीवन स्तर सुधरे।


शिक्षा और छात्र कल्याण पर विशेष ध्यान

जनजातीय छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने प्री व पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के वितरण में तेजी लाने और पात्र छात्रों को समय पर साइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि कोई भी योग्य छात्र तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से सरकारी लाभ से वंचित न रहे। शिक्षा के क्षेत्र में यह निवेश आने वाले समय में जनजातीय समाज के सशक्तिकरण का आधार बनेगा।


 रोजगार सृजन और आर्थिक स्वावलंबन

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मत्स्य विभाग की योजनाओं और 'मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना' की समीक्षा की गई। मत्स्य पालन से जुड़े लाभुकों को मिलने वाली वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन पर चर्चा हुई ताकि स्वरोजगार के अवसर बढ़ें। इसके अतिरिक्त, वनाधिकार पट्टा वितरण की स्थिति का जायजा लिया गया, जो जनजातीय समुदायों के आर्थिक और भूमि अधिकारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्यटन संवर्धन के तहत स्थानीय पर्यटन स्थलों के विकास की योजना भी बनाई गई है ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुल सकें।


विधिक सेवा शिविर और राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन

सिदगोड़ा टाउन हॉल में राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर और राष्ट्रीय लोक अदालत का गरिमामय आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद द्वारा किया गया।

आयोजन की मुख्य झलकियाँ

इस अवसर पर न्यायिक और प्रशासनिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें माननीय न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविन्द कुमार पांडेय, उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी और ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग शामिल थे।

  • सांस्कृतिक वृत: कार्यक्रम का शुभारंभ कस्तूरबा विद्यालय की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत सुमधुर स्वागत गान से हुआ।

  • जागरूकता प्रसार: सूचना और तकनीक के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के लिए एलईडी स्क्रीन पर नालसा (NALSA) गीत और लीगल ऐड क्लीनिक पर आधारित एक ज्ञानवर्धक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई।

  • प्रदर्शनी का अवलोकन: मंचीय कार्यक्रम के समापन के पश्चात, अतिथियों ने जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भ्रमण किया। इस प्रदर्शनी में सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और स्थानीय विशिष्ट उत्पादों का सजीव प्रदर्शन किया गया था।

न्याय और सशक्तिकरण का संगम

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि इस शिविर का उद्देश्य केवल वादों का निपटारा करना नहीं, बल्कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करना और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक सुलभ कराना है। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने भी दोहराया कि न्याय और विकास एक-दूसरे से जुड़े हैं। जब समाज का कमजोर वर्ग जागरूक होगा, तभी वास्तविक सशक्तिकरण संभव है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जो एकता और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध का प्रतीक रहा।


1.42 करोड़ राशि का परिसम्पति लाभुकों के बीच वितरित

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के द्वारा मंच से लगभग 1.42 करोड़ राशि का परिसम्पति लाभुकों के बीच वितरित की गई। झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से गोविंदपुर आजीविका संकुल संगठन के श्रीमती कविता देवी तथा पुनम देवी को 40 लाख का चेक, कल्याण विभाग की योजना  तहत बिरसा आवास योजना से समीर सबर को गृह प्रवेश, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत श्री जादु हेम्ब्रम को 11.30 लाख का ऋण, श्री नानु पूर्ति को वन अधिकार पट्टा, समाज कल्याण विभाग की योजना के तहत कपील देव शर्मा को कान मशीन, सामाजिक सुरक्षा स्वामी विवेकानंद निःशक्त पेंशन योजना के तहत श्री किशुन टुडू, श्री आयुष रजक को स्पॉशरशिप स्वीकृति, उद्यान विभाग की योजना तहत साईबा मुर्मू को कीट रहित सब्जी उत्पादन इकाई, श्री राहुल बारीक को पॉली हाउस निर्माण हेतु राशि का चेक, सहकारिता विभाग की योजना तहत सगेन सकाम, कृषक उत्पादक समूह डुमरिया को प्रमाण पत्र, गव्य विकास की दुधारू गाय वितरण योजना के तहत श्रीमती रूपा गुप्ता, पशुपालन विभाग की बकरा विकास योजना के तहत श्री पम्पा मंडल, मत्स्य विभाग की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की तहत श्री कैलाश बानरा, स्वास्थ्य विभाग की कुष्ठ निवारण ईकाई के द्वारा श्री अजीत देवरी को किट, श्रीमती बसंती देवी को मलेरिया किट एवं श्रम विभाग की मृत्यु दुर्घटना सहायता योजना के तहत श्री जासई सोरेन को 2 लाख की राशि प्रदान की गई।

बीमा दावों का त्वरित भुगतान और राहत

न्यायिक ट्रिब्यूनल के निर्णयों के आधार पर सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के आश्रितों को बड़ी राहत प्रदान की गई। विभिन्न बीमा कंपनियों के माध्यम से कुल मिलाकर एक बड़ी राशि के चेक वितरित किए गए। इसमें प्रमुख रूप से श्रीमती जयंती व सुचिता प्रधान को 70 लाख रुपये, महेंद्र कुमार राम को 34.02 लाख रुपये और लालती देवी को 31.34 लाख रुपये समेत अन्य परिवारों को उनके दावों का भुगतान किया गया, जिससे पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल मिला।