सेना के जांबाजों ने संभाली कमान
इस हाई-रिस्क और संवेदनशील ऑपरेशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने किया। उनके साथ नायब सूबेदार आनंद स्वरूप सिंह, हवलदार कंवलदीप सिंह, हवलदार दलबीर सिंह, नायक सीएएम नौटियाल, लांस नायक मनोज और सेपर पंकज जैसे प्रशिक्षित और अनुभवी जवान शामिल थे। यह टीम विशेष रूप से विस्फोटक निष्क्रिय करने के कार्य में दक्ष मानी जाती है। ऑपरेशन के दौरान हर कदम अत्यंत सावधानी और तकनीकी समझ के साथ उठाया गया। जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर इस बम को निष्क्रिय किया, जो उनकी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण है। सेना के इन जांबाजों की सूझबूझ और साहस ने संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।
सुरक्षा के लिए सख्त इंतजाम, उड़ानें भी रोकी गईं
इस ऑपरेशन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुरक्षा के मद्देनजर कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन से उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। सेना ने मंगलवार से ही घटनास्थल का भौगोलिक सर्वेक्षण शुरू कर दिया था। नदी के बहाव, आसपास के भू-भाग और संभावित खतरे का बारीकी से अध्ययन किया गया। बुधवार को ऑपरेशन के दौरान करीब एक किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर दिया गया। प्रशासन ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। पुलिस और जिला प्रशासन ने भी सेना के साथ मिलकर बेहतरीन समन्वय स्थापित किया, जिससे पूरा अभियान व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सका।
तकनीकी रणनीति से किया गया नियंत्रित विस्फोट
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बम अत्यंत शक्तिशाली था और इसका विस्फोट व्यापक तबाही मचा सकता था। ऐसे में सेना ने इसे निष्क्रिय करने के लिए विशेष रणनीति अपनाई। बम को जमीन के अंदर लगभग 10 फीट गहरे एक गड्ढे में रखा गया, ताकि विस्फोट की ऊर्जा ऊपर की बजाय नीचे की ओर सीमित हो सके। इसके साथ ही गड्ढे के चारों ओर और ऊपर बालू से भरी बोरियों का मजबूत घेरा (बंकर) बनाया गया, जिससे विस्फोट के दौरान निकलने वाले छर्रे या मिट्टी बाहर न फैल सके। टीम ने घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर अपना ऑपरेशन सेंटर बनाया और वहीं से पूरे विस्फोट को नियंत्रित किया। यह रणनीति बेहद कारगर साबित हुई और बिना किसी नुकसान के बम को निष्क्रिय कर दिया गया।
सफलता के बाद जश्न, लोगों ने जताया आभार
जैसे ही सेना ने ऑपरेशन की सफलता की पुष्टि की, वहां मौजूद ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। लोगों ने तालियां बजाकर सेना के जवानों का स्वागत किया और उनका आभार व्यक्त किया। लंबे समय से मंडरा रहा खतरा टल जाने के बाद इलाके में राहत का माहौल है। जिला प्रशासन, पुलिस और सेना के बीच बेहतर तालमेल और तकनीकी दक्षता के कारण यह कठिन अभियान बिना किसी जान-माल के नुकसान के पूरा हुआ। फिलहाल सेना की टीम इलाके में जांच कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई अन्य विस्फोटक या अवशेष शेष न रह जाए।

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