झारखण्ड का सबसे बड़ा और लोकप्रिय आदिवासी महोत्सव राष्ट्रीय मागे पोरोब इस वर्ष 11 और 12 अप्रैल को जमशेदपुर में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इस दो दिवसीय महोत्सव को लेकर आदिवासी समाज के लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। कार्यक्रम के आयोजक पिंटू चकिया ने बताया कि यह महोत्सव हर वर्ष वृहत पैमाने पर आयोजित किया जाता है और इसे जमशेदपुर शहर के बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों में से एक माना जाता है।
पिंटू चकिया ने कहा कि राष्ट्रीय मागे पोरोब केवल एक पर्व नहीं बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस महोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने रीति-रिवाज, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में झारखण्ड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल होते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इस वर्ष भी महोत्सव को भव्य बनाने की पूरी तैयारी की जा रही है। कार्यक्रम स्थल पर पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। साथ ही विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक मंचों के कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे, जिससे कार्यक्रम और भी आकर्षक बनेगा।
आयोजक पिंटू चकिया के अनुसार, इस महोत्सव में हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोगों का जमावड़ा होता है। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं और पुरुष जब ढोल-नगाड़ों की थाप पर सामूहिक नृत्य करते हैं तो पूरा माहौल उत्सवमय हो जाता है। यह दृश्य झारखण्ड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की अनूठी पहचान प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मागे पोरोब का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं बल्कि समाज में भाईचारा, एकता और सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करना भी है। यही कारण है कि हर वर्ष इस कार्यक्रम में लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
पिंटू चकिया ने जमशेदपुर सहित आसपास के सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि 11 और 12 अप्रैल को आयोजित होने वाले इस भव्य राष्ट्रीय मागे पोरोब महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आदिवासी संस्कृति और परंपरा के इस महान उत्सव का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम झारखण्ड की पहचान और गौरव का प्रतीक है, जिसमें आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
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