Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले में अब किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। खासकर जरबेरा (Gerbera) फूल की खेती किसानों के लिए आमदनी का बेहतर साधन बनकर उभर रही है। जिले के कई किसानों ने इस खेती को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। कम जमीन में अधिक लाभ देने वाली यह खेती ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का नया विकल्प बनती जा रही है। आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग के कारण किसान अब फूलों की खेती में भी बेहतर भविष्य देख रहे हैं।

पूरे साल रहती है जरबेरा फूल की मांग
जरबेरा फूल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बाजार में लगातार बनी रहने वाली मांग है। शादी-विवाह, होटल सजावट, बुके, जन्मदिन समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न प्रकार के डेकोरेशन में इस फूल का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। इसकी खूबसूरती और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। यही वजह है कि किसान इसे लाभदायक खेती मान रहे हैं। स्थानीय बाजार के अलावा बड़े शहरों में भी इसकी सप्लाई की जाती है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ रही है।

सरकारी योजना और सब्सिडी से मिल रही मदद
जिला उद्यान विभाग द्वारा किसानों को जरबेरा फूल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार की उद्यान विकास योजना के तहत किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इससे खेती की शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है। पॉलीहाउस निर्माण, पौध खरीद और सिंचाई व्यवस्था जैसी सुविधाओं में भी किसानों को सहायता मिल रही है। जिला उद्यान पदाधिकारी अनीमा लकड़ा ने बताया कि जिले में अब तक 20 यूनिट किसानों को उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार की यह योजना किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है।

कई वर्षों से हो रही है सफल खेती
पूर्वी सिंहभूम जिले में पिछले कई वर्षों से जरबेरा फूल की खेती की जा रही है। शुरुआत में कुछ किसानों ने प्रयोग के तौर पर इसे अपनाया था, लेकिन बेहतर मुनाफा मिलने के बाद अब अन्य किसान भी इससे जुड़ते जा रहे हैं। खेती में वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से फूलों की गुणवत्ता बेहतर हो रही है। किसानों को प्रशिक्षण देकर आधुनिक तरीके से खेती करना सिखाया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि जिले के किसान अब फूल उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

युवाओं के लिए बन रहा रोजगार का माध्यम
जरबेरा फूल की खेती ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का नया अवसर लेकर आई है। पहले जहां युवा रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन करते थे, वहीं अब वे गांव में रहकर आधुनिक खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं। कम समय में बेहतर आय मिलने के कारण युवा वर्ग इस खेती में विशेष रुचि दिखा रहा है। कई किसान परिवारों ने फूलों की खेती से अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है। इससे गांवों में स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिल रहा है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे किसान
जिला उद्यान पदाधिकारी अनीमा लकड़ा ने कहा कि जरबेरा फूल की खेती किसानों को सिर्फ रोजगार ही नहीं दे रही, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रही है। सरकार की योजनाओं और किसानों की मेहनत से जिले में फूलों की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह खेती किसानों के लिए आय का बड़ा स्रोत बन सकती है। जरबेरा की खेती यह साबित कर रही है कि आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी सहयोग से किसान अपनी जिंदगी बदल सकते हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।