Jamshedpur News: केरूआडूंगरी पंचायत अंतर्गत भुडरूडीह गांव में शनिवार को ओल चिकी सेंटर का उद्घाटन उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। पंचायत के मुखिया श्री कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में शुरू किया गया यह सेंटर संथाली भाषा, लिपि और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, विद्यार्थियों और सामाजिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। गांव के लोगों ने इस पहल को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक कदम बताते हुए इसकी सराहना की।

पारंपरिक स्वागत के साथ हुआ उद्घाटन समारोह
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार अतिथियों के स्वागत से हुई। मुख्य अतिथि पंचायत मुखिया श्री कान्हू मुर्मू सहित उपस्थित गणमान्य लोगों का फूल-माला एवं पारंपरिक मुकुट पहनाकर अभिनंदन किया गया। इसके बाद ओल चिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह के दौरान पूरे वातावरण में सांस्कृतिक गौरव और भाषा प्रेम की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। ग्रामीणों ने पारंपरिक गीत-संगीत और सामाजिक एकता के माध्यम से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

युवाओं में दिखा भाषा सीखने का उत्साह
ओलचिकी सेंटर के उद्घाटन अवसर पर लगभग 50 छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर अपनी मातृभाषा और लिपि सीखने की इच्छा जाहिर की। यह उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय युवाओं और बच्चों में अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। उद्घाटन के साथ ही सेंटर में नियमित पठन-पाठन कार्य भी शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों का मानना है कि यह सेंटर बच्चों और युवाओं को अपनी भाषा से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति भी जागरूक करेगा। ओल चिकी शिक्षिका सुमित्रा बास्के द्वारा विद्यार्थियों को प्रारंभिक शिक्षा दी गई।

समाज की पहचान है ओलचिकी : कान्हू मुर्मू
मुखिया ने अपने संबोधन में कहा कि ओल चिकी केवल एक लिपि नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, अस्मिता और संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आधुनिकता के प्रभाव के कारण पारंपरिक भाषाएं और संस्कृतियां धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही हैं। ऐसे समय में ओल चिकी सेंटर की स्थापना समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगी। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी मातृभाषा को सीखें, उसे दैनिक जीवन में उपयोग करें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि भाषा का संरक्षण ही संस्कृति और समाज की मजबूती का आधार है।

सामाजिक प्रतिनिधियों की रही सक्रिय भागीदारी
उद्घाटन समारोह में माझी बाबा शंकर राम बेसरा, माझी बाबा गुमदी बेसरा, पाडमान तरुण कुमार, किशोरी बेसरा, शांतिलता टुडू, लक्ष्मी टुडू, चम्पा मुर्मू, माया हेंब्रम, सीमा बेसरा, सीमा बास्के सहित कई गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती चम्पा मुर्मू ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती माया हेंब्रम द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भाषा और संस्कृति संरक्षण को लेकर अपने विचार साझा किए तथा सेंटर के संचालन में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।

सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करेगा ओल चिकी सेंटर
ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि भुडरूडीह गांव में शुरू हुआ यह ओल चिकी सेंटर आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बनेगा। उनका कहना था कि भाषा शिक्षा के माध्यम से बच्चों और युवाओं में सांस्कृतिक चेतना मजबूत होगी तथा वे अपनी परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि इस तरह की पहल अन्य गांवों में भी की जाए तो संथाली भाषा और ओल चिकी लिपि को नई मजबूती मिलेगी। सेंटर के शुभारंभ से गांव में उत्साह का माहौल है और लोग इसे समाज के उज्ज्वल भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं।