Ad Code

Responsive Advertisement

Chakulia News: चाकुलिया के गांवों में पहुंचे उपायुक्त, योजनाओं की जमीनी हकीकत देखा

Chakulia News:सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं फाइलों से निकलकर धरातल पर कितनी प्रभावी हैं, इसका जायजा लेने के लिए पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी स्वयं चाकुलिया प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में पहुँचे। पंचायत भ्रमण के दौरान उन्होंने न केवल विकास कार्यों का निरीक्षण किया, बल्कि ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं भी सुनीं। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पारदर्शिता के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करना अधिकारियों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।



पंचायतों का स्थलीय निरीक्षण और ग्रामीणों से सीधा संवाद

उपायुक्त ने अपने भ्रमण कार्यक्रम की शुरुआत चाकुलिया प्रखंड की जमुआ और चंदनपुर पंचायत से की। इस दौरान वे माचाडीह, शाखाभांगा, झरिया और जामुआ जैसे गांवों में पहुँचे। उन्होंने वहां चल रही विभिन्न योजनाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण की खास बात यह रही कि उपायुक्त ने केवल कागजों पर भरोसा न कर, सीधे लाभुकों और ग्रामीणों से बात की। उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें योजनाओं का लाभ समय पर मिल रहा है और क्या बिचौलियों जैसी कोई समस्या तो नहीं आ रही। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं का लाभ 'अंतिम व्यक्ति' तक पहुँचना चाहिए।



आवास योजनाओं की प्रगति पर विशेष जोर

ग्रामीण विकास के लिए आवास एक बुनियादी जरूरत है। उपायुक्त ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और राज्य सरकार की अबुआ आवास योजना के तहत बन रहे घरों का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने लाभुकों को भी प्रोत्साहित किया कि जैसे ही उन्हें किस्त की राशि प्राप्त हो, वे तुरंत निर्माण सामग्री जुटाकर काम आगे बढ़ाएं ताकि वे जल्द अपने नए घर में प्रवेश कर सकें।



बच्चों के भविष्य के लिए 'आधार और जन्म प्रमाण पत्र' का लक्ष्य

प्रखंड मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने पाया कि कई स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों के पास अब भी आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। उन्होंने सभी पंचायत सचिवों को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि एक माह के भीतर सभी नामांकित बच्चों के ये दस्तावेज बन जाने चाहिए। उपायुक्त ने तर्क दिया कि इन दस्तावेजों के बिना बच्चे भविष्य में कई सरकारी योजनाओं और छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित रह सकते हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।



आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली और पोषण ट्रैकर

बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर उपायुक्त काफी गंभीर नजर आए। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण किया और वहां दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने सेविका और सहायिका को स्पष्ट निर्देश दिया कि बच्चों को मिलने वाले पोषाहार में कोई कटौती न हो। साथ ही, बच्चों के वजन और स्वास्थ्य संबंधी डेटा की एंट्री 'पोषण ट्रैकर' ऐप में समय पर और सही-सही की जाए। उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में डेटा की सटीकता बहुत जरूरी है।



हड़ताल के बीच विकास कार्यों को गति देने का 'प्लान बी'

वर्तमान में रोजगार सेवकों की हड़ताल के कारण मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका थी। इसका समाधान निकालते हुए उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 'मेट' (Mates) को सक्रिय करें। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल विकास कार्यों में बाधा नहीं बननी चाहिए। वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित किया जाए कि गांवों में रोजगार के अवसर बने रहें और निर्माण कार्य ठप न हों।

कालाबाजारी पर लगाम और जनकल्याणकारी सेवाओं की समीक्षा

बैठक में प्रखंड क्षेत्र में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति और वितरण पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने आपूर्ति पदाधिकारी से स्टॉक और वितरण की जानकारी ली। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि रसोई गैस के भंडारण और वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और यदि कहीं भी कालाबाजारी की सूचना मिलती है, तो संबंधितों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, उन्होंने प्रखंड कल्याण पदाधिकारी को चिकित्सा अनुदान के आवेदनों की संख्या बढ़ाने और पशु चिकित्सा पदाधिकारी को पशुधन वितरण के लक्ष्यों को शत-प्रतिशत पूरा करने का निर्देश दिया।

पारदर्शिता और जवाबदेही: प्रशासन का नया संकल्प

भ्रमण के अंत में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों और कर्मियों को एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान उन्हें जो फीडबैक मिला है, उसके आधार पर कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे केवल दफ्तरों में न बैठें, बल्कि नियमित रूप से क्षेत्रों का दौरा करें। सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी और समयबद्ध होना चाहिए ताकि जनता का भरोसा प्रशासन पर बना रहे।

Post a Comment

0 Comments

Ad Code

Responsive Advertisement