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Jamshedpur: परसुडीह हाट-बाजार में मौत बनकर गिरा पक्की दुकान का छज्जा, बाल-बाल बचे दर्जनों लोग

Parsudih News: परसुडीह हाट-बाजार में सोमवार की शाम एक भयावह मंजर देखने को मिला। प्रकृति के रौद्र रूप और प्रशासनिक लापरवाही के बीच यहाँ एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। शाम के वक्त जब बाजार अपनी पूरी रफ़्तार में था, तभी एक जर्जर दुकान का भारी-भरकम छज्जा भरभराकर नीचे आ गिरा। इस घटना ने न केवल बाजार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि स्थानीय दुकानदारों और ग्राहकों के मन में दहशत पैदा कर दी है।



आंधी-बारिश के बीच अचानक मची अफरा-तफरी

सोमवार की शाम जमशेदपुर के मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी और झमाझम बारिश के बीच परसुडीह हाट-बाजार में लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान, बाजार स्थित 'दत्ता रेडीमेड स्टोर' के ठीक सामने वाली पक्की दुकान का ऊपरी छज्जा अचानक ढह गया। छज्जा गिरने की आवाज इतनी जोरदार थी कि पूरा इलाका दहल उठा। आंधी की गड़गड़ाहट के बीच कंक्रीट के मलबे के गिरने की आवाज सुनकर लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, जिससे बाजार के उस हिस्से में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।



भीड़भाड़ वाले इलाके में टली बड़ी जनहानि

गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह छज्जा गिरा, उसके ठीक नीचे कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। सोमवार का दिन होने के कारण बाजार में ग्राहकों की खासी भीड़ थी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर यह हादसा कुछ सेकंड पहले या बाद में होता, तो कई लोग इसकी चपेट में आ सकते थे। हालांकि, इंसानी जान तो बच गई, लेकिन मलबे के नीचे खड़ी एक मोटरसाइकिल पूरी तरह से चकनाचूर हो गई है। मोटरसाइकिल मालिक और आसपास के दुकानदार इस चमत्कारिक बचाव के लिए ईश्वर का धन्यवाद कर रहे हैं।

'कंडम' घोषित इमारतों का खौफनाक सच

परसुडीह हाट-बाजार की यह समस्या नई नहीं है। कृषि उत्पादन बाजार समिति (APMC) ने बहुत पहले ही इन पक्की दुकानों को 'कंडम' यानी असुरक्षित घोषित कर रखा है। विशेष रूप से इन इमारतों की पहली मंजिल की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वह कभी भी जमींदोज हो सकती है। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें और छतों से झांकती जंग लगी लोहे की छड़ें यहाँ के खौफनाक मंजर की गवाही दे रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहाँ से प्लास्टर और कंक्रीट के छोटे टुकड़े गिरना अब एक रोज की बात बन चुकी है।

दुकानदारों का 'टीन शेड' वाला देसी जुगाड़

प्रशासनिक मदद की उम्मीद छोड़ चुके ग्राउंड फ्लोर के दुकानदारों ने अपनी और अपने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए स्वयं ही उपाय किए हैं। दुकानदारों ने जर्जर छज्जों के नीचे लोहे के टीन शेड लगा दिए हैं। उनका मानना है कि ये शेड कम से कम छोटे-मोटे प्लास्टर के टुकड़ों को रोकने में सक्षम होंगे। सोमवार की घटना में भी कुछ हद तक इन शेडों ने मलबे की गति को रोकने का काम किया, लेकिन जिस तरह से पूरा छज्जा गिरा, उसने यह साबित कर दिया कि ये अस्थायी टीन शेड किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए नाकाफी हैं।

प्रशासनिक उदासीनता और दुकानदार संघ का आक्रोश

परसुडीह हाट पक्के दुकानदार संघ ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे दर्जनों बार लिखित आवेदन देकर जर्जर पहली मंजिल को तोड़ने और नए सिरे से मरम्मत कराने की मांग कर चुके हैं। दुकानदारों का आरोप है कि प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है। बार-बार के पत्राचार के बावजूद अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे व्यापारियों के बीच गहरा रोष और असुरक्षा की भावना व्याप्त है।

समय रहते कार्रवाई की सख्त जरूरत

सोमवार की यह घटना प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। परसुडीह हाट-बाजार में प्रतिदिन हजारों की संख्या में ग्रामीण और शहरवासी खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। यदि जर्जर ढांचों को तत्काल नहीं हटाया गया, तो मानसून के दौरान स्थिति और भी घातक हो सकती है। स्थानीय नागरिकों ने जिला उपायुक्त से मांग की है कि विशेषज्ञों की टीम भेजकर पूरी इमारत की जांच कराई जाए और जोखिम भरे हिस्सों को अविलंब ध्वस्त किया जाए, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष की जान न जाए।

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