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कदमा में थर्ड जेंडर समुदाय को बड़ी सौगात, शहर में बन रहा पहला सामुदायिक भवन

Jamshedpur News: जमशेदपुर में थर्ड जेंडर (ट्रांसजेंडर) समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) की ओर से कदमा स्थित शास्त्रीनगर में ₹24.87 लाख की लागत से शहर का पहला सामुदायिक भवन बनाया जाएगा। यह भवन न केवल एक स्थायी ठिकाना प्रदान करेगा, बल्कि सामाजिक समावेशन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

परियोजना को टाटा स्टील से मिली हरी झंडी

इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए टाटा स्टील से आवश्यक एनओसी प्राप्त हो चुकी है, जिससे निर्माण कार्य का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। जेएनएसी के उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार ने बताया कि सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। यह भवन शहर में अपनी तरह का पहला सरकारी प्रयास है, जो थर्ड जेंडर समुदाय को समर्पित होगा।

छह माह में पूरा होगा भवन करने का निर्माण कार्य 

प्रशासन ने इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद छह महीने के भीतर भवन तैयार करने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार, काम की गुणवत्ता के साथ समयसीमा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि समुदाय को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

केवल भवन नहीं, बनेगा सशक्तिकरण का केंद्र

यह सामुदायिक भवन सिर्फ एक आश्रय स्थल नहीं होगा, बल्कि इसे कौशल विकास केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यहां ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सिलाई, ब्यूटी थेरेपी, कंप्यूटर शिक्षा और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल की जाएगी।

थर्ड जेंडर समुदाय को मिलेगा स्थायी ठिकाना

अक्सर समाज के हाशिए पर रहने वाले इस समुदाय के पास अपने कार्यक्रमों और बैठकों के लिए कोई स्थायी स्थान नहीं होता। इस भवन के निर्माण से उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक स्थान मिलेगा, जहां वे अपनी गतिविधियां संचालित कर सकेंगे और सामाजिक रूप से सशक्त हो सकेंगे।

नए बिल के विरोध में सड़क पर उतरे ट्रांसजेंडर

इसी बीच, अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए ट्रांसजेंडर समुदाय ने विरोध का रास्ता अपनाया है। सोमवार सुबह 11 बजे साकची गोलचक्कर से उपायुक्त कार्यालय तक एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। समुदाय के सदस्यों का कहना है कि वर्ष 2026 में आए नए बिल के कुछ प्रावधान उनकी पहचान और अधिकारों पर सवाल खड़े करते हैं।

पहचान और अधिकार की लड़ाई जारी
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह उनके अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई है। उनका कहना है कि सरकार को ऐसे किसी भी कानून पर पुनर्विचार करना चाहिए, जो उनकी पहचान को कमजोर करता हो।

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