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झारखंड में संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्ति प्रक्रिया तेज, सूचना आयुक्तों के नाम राजभवन भेजे गये

Jharkhand : रांची में संवैधानिक संस्थाओं के रिक्त पदों को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच राज्य सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया को तेज कर दिया है। झारखंड हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता (एजी) ने कोर्ट को बताया कि इन पदों को भरने के लिए चयन समिति की बैठक आयोजित की जा चुकी है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही इससे संबंधित निर्णय कोर्ट को उपलब्ध करा दिया जाएगा।

सूचना आयुक्तों के लिए पांच नाम राजभवन भेजे गये

राज्य सरकार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए पांच नामों की सूची तैयार कर उसे मंजूरी के लिए राजभवन भेज दिया है। इस सूची में वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा, धर्मवीर सिन्हा, रांची विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक (अनुबंध) और पूर्व छात्र नेता तनुज खत्री, कांग्रेस नेता अमूल्य नीरज खलखो तथा भाजपा प्रवक्ता शिवपूजन पाठक के नाम शामिल हैं। कार्मिक विभाग द्वारा तैयार की गई इस सूची पर अब राज्यपाल की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। स्वीकृति मिलते ही नियुक्ति की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच हुई बैठक

सूचना आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बीच बैठक हुई थी। इसी बैठक में विभिन्न नामों पर चर्चा कर सहमति बनाई गई और उसके बाद अंतिम सूची तैयार की गई। यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि सूचना आयोग जैसी संस्थाओं में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार और विपक्ष दोनों की भागीदारी आवश्यक होती है।

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई और अगली तारीख

इस मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में अवमानना याचिका सहित कई जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। कोर्ट ने उनकी दलीलों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।

चयन समिति की बैठक और आगे की प्रक्रिया

महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 25 मार्च को चयन समिति की बैठक आयोजित की जा चुकी है, जिसमें संवैधानिक संस्थाओं के रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री के राज्य से बाहर होने के कारण इन निर्णयों को औपचारिक रूप से साझा नहीं किया जा सका है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही चयन समिति के निर्णयों की विस्तृत जानकारी कोर्ट को दी जाएगी।

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी और मामले की स्थिति

इस मामले में याचिकाकर्ता राजकुमार की ओर से वरीय अधिवक्ता वीपी सिंह और अधिवक्ता अभय कुमार मिश्र ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा उठाया कि संवैधानिक संस्थाओं में लंबे समय से पद रिक्त हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा जताई है। अब सभी की नजरें 13 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को अपने निर्णयों की स्पष्ट जानकारी देनी होगी।

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