Jamshedpur News: संताली समाज के लिए बईसख कुनामी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, भाषा और विरासत को याद करने का दिन है। इस खास अवसर पर ओल गुरु पं० रघुनाथ मुर्मू की 121वीं जयंती मनाई जाएगी। इसी पावन दिन को और अधिक सार्थक बनाने के लिए जाटाझोपड़ी, बागबेड़ा में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल समाज को एकजुट करने के साथ-साथ मानवता की सेवा का भी संदेश देती है।

रक्तदान शिविर को सफल बनाने के लिए डोर टू डोर चला रहे अभियान 
3 मई, रविवार को राजकीय प्राथमिक विद्यालय, जाटाझोपड़ी में सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक यह शिविर चलेगा। इस आयोजन की जिम्मेदारी सामाजिक संस्था ‘नई जिंदगी परिवार’ और जाटाझोपड़ी यंग ब्वॉयज क्लब ने मिलकर उठाई है। गांव के युवा साथी अभी से पूरे उत्साह के साथ तैयारी में जुटे हुए हैं और गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। जमशेदपुर ब्लड सेंटर की टीम इस शिविर में रक्त संग्रह करेगी।


ट्राइबल ब्लड मैन राजेश मार्डी ने खुद संभाली है मोर्चा
इस आयोजन की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं आदिवासी समाज के गौरव, “ट्राइबल ब्लड मैन” के नाम से प्रसिद्ध राजेश मार्डी, जिन्होंने अब तक 80 बार रक्तदान कर एक मिसाल कायम की है। उनके साथ गोकुल चंद्र हांसदा भी इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। राजेश मार्डी का कहना है, “रक्तदान सिर्फ एक दान नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी बचाने का सबसे आसान और महान तरीका है। जब भी मैं रक्तदान करता हूं, मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने किसी को नया जीवन दिया हो।” उनका यह जज्बा युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

रक्तदान को यूं ही नहीं कहा जाता है महादान
रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि यह सीधे किसी की जान बचाने से जुड़ा होता है। हर दिन कई मरीजों को दुर्घटनाओं, सर्जरी और गंभीर बीमारियों के कारण रक्त की आवश्यकता होती है। ऐसे में एक यूनिट रक्त किसी के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क बन सकता है। इसके अलावा, रक्तदान करने से शरीर में नए रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है, जिससे शरीर स्वस्थ और सक्रिय रहता है। यह दिल की बीमारियों के जोखिम को भी कम करता है और  मानसिक संतोष प्रदान करता है।


रक्तदान करने वाले युवाओं को किया जायेगा सम्मानित 
इस शिविर में रक्तदान करने वाले सभी लोगों को प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, भविष्य में जरूरत पड़ने पर उन्हें रक्त उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया जाएगा। इससे लोगों का विश्वास बढ़ता है और वे निःसंकोच आगे आकर इस नेक कार्य में भाग लेते हैं। यह पहल समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे को भी मजबूत करती है।

एक कदम इंसानियत की ओर बढ़ना है जरूरी 
जाटाझोपड़ी का यह रक्तदान शिविर सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है-इंसानियत के लिए, जीवन बचाने के लिए। यह हमें सिखाता है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। अगर हर व्यक्ति साल में सिर्फ एक बार रक्तदान करने का संकल्प ले, तो देश में कभी भी रक्त की कमी नहीं होगी। इसलिए आइए, इस बईसख कुनामी पर हम भी संकल्प लें-“रक्तदान करेंगे, जीवन बचाएंगे।” यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी ओल गुरु को और यही मानवता की सबसे बड़ी सेवा भी।