Mojtaba Khamenei: पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात किसी बारूद के ढेर से कम नहीं हैं। इस तनाव के बीच ईरान से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया 'सुप्रीम लीडर' (सर्वोच्च नेता) चुन लिया गया है। यह फैसला न केवल ईरान के भविष्य के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीति (Geopolitics) के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
यहाँ इस पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. चुनाव और सत्ता का हस्तांतरण
ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने मोजतबा खामेनेई के नाम पर मुहर लगाई है। मोजतबा के चुने जाने के पीछे सबसे बड़ी शक्ति ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना के भारी दबाव के कारण ही असेंबली ने यह फैसला लिया।
दिलचस्प बात यह है कि खुद अयातुल्ला अली खामेनेई ने पिछले साल अपने संभावित उत्तराधिकारियों की जो सूची बनाई थी, उसमें मोजतबा का नाम शामिल नहीं था। लेकिन इजरायल और अमेरिका के हालिया हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद स्थितियां तेजी से बदलीं और मोजतबा को नेतृत्व सौंपा गया।
2. कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में ईरान के माशहद शहर में हुआ था। वह उस दौर में पले-बढ़े जब उनके पिता शाह के शासन के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व कर रहे थे।
बिना पद के प्रभाव: मोजतबा की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि उन्होंने कभी भी कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला। इसके बावजूद, उन्हें ईरान की सत्ता के गलियारों में सबसे ताकतवर व्यक्तियों में से एक माना जाता रहा है।
युद्ध का अनुभव: उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में सक्रिय रूप से भाग लिया था। युद्ध के दौरान उनके परिवार के कई सदस्यों (पत्नी, बेटी, पोता आदि) की जान चली गई, लेकिन मोजतबा जीवित बचे रहे।
सैन्य संबंध: उनके संबंध IRGC के साथ बहुत गहरे हैं। यही कारण है कि आज संकट की घड़ी में सेना ने उन पर भरोसा जताया है।
3. धार्मिक और राजनीतिक विवाद
मोजतबा का चयन ईरान की स्थापित परंपराओं के खिलाफ माना जा रहा है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
वंशानुगत शासन का विरोध: 1979 की इस्लामी क्रांति का मूल आधार ही राजशाही और वंशवाद को खत्म करना था। ईरान खुद को एक ऐसी व्यवस्था के रूप में पेश करता रहा है जहाँ योग्यता के आधार पर चयन होता है। अब पिता के बाद बेटे का चुना जाना इस विचारधारा पर सवाल उठाता है।
धार्मिक योग्यता की कमी: ईरान के सर्वोच्च नेता के लिए 'उच्च पदस्थ धार्मिक विद्वान' होना अनिवार्य माना जाता है। मोजतबा के पास वह धार्मिक दर्जा नहीं है जो उनके पिता या उनसे पहले के नेताओं के पास था।
4. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और छवि
साल 2019 में अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने मोजतबा पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि मोजतबा बिना किसी चुनाव या नियुक्ति के अपने पिता के कार्यालय का कामकाज संभाल रहे थे और एक अघोषित शासक की तरह व्यवहार कर रहे थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें एक 'कट्टरपंथी' और 'पर्दे के पीछे से खेल खेलने वाला' नेता माना जाता रहा है।
5. पश्चिम एशिया पर प्रभाव
मोजतबा के सर्वोच्च नेता बनते ही क्षेत्र में युद्ध की आहट तेज हो गई है।
जवाबी हमले: अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।
कट्टर रुख: माना जा रहा है कि मोजतबा अपने पिता की तुलना में अधिक आक्रामक रुख अपना सकते हैं, जिससे इजरायल-ईरान संघर्ष एक पूर्ण युद्ध का रूप ले सकता है।

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