इको-टूरिज्म का नया हब बनता झारखंड: 2026 की महत्वाकांक्षी योजनाएं

 झारखंड, जिसे 'वनों की भूमि' कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और धार्मिक महत्व के लिए विश्व विख्यात है। हाल के वर्षों में, राज्य सरकार ने पर्यटन को अर्थव्यवस्था के एक मुख्य स्तंभ के रूप में विकसित करने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम शुरू किया है। वर्ष 2026 तक झारखंड पर्यटन क्षेत्र में एक नई क्रांति की ओर अग्रसर है।


नई पर्यटन नीति और बुनियादी ढांचे का विकास

झारखंड सरकार की 'पर्यटन नीति 2022' के सफल क्रियान्वयन के बाद, अब राज्य में बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश किया जा रहा है। बजट 2026-27 में पर्यटन के लिए लगभग 361.67 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य न केवल पर्यटकों को आकर्षित करना है, बल्कि उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना भी है।

  • ग्लास ब्रिज और स्काईवॉक: पर्यटकों के अनुभव को रोमांचक बनाने के लिए रांची के दशम और जोन्हा जलप्रपात पर 'ग्लास ब्रिज' के निर्माण की योजना है। वहीं, पतरातू घाटी में 'स्काईवॉक' बनाने का प्रस्ताव है, जो पर्यटकों को पहाड़ियों का विहंगम दृश्य प्रदान करेगा।

  • रोपवे परियोजनाएं: पहाड़ियों पर स्थित धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के लिए चतरा के कोलेश्वरी पहाड़ और हुंडरू फॉल जैसे क्षेत्रों में रोपवे का जाल बिछाया जा रहा है।

धार्मिक और इको-टूरिज्म सर्किट

झारखंड में पर्यटन को व्यवस्थित करने के लिए सरकार ने इसे पांच प्रमुख सर्किटों में विभाजित किया है:

  1. धार्मिक सर्किट: देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम), पारसनाथ, रजरप्पा और इटखोरी का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। देवघर हवाई अड्डे के चालू होने से यहाँ पर्यटकों की संख्या में 30% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

  2. इको-सर्किट: लातेहार-नेतरहाट-बेतला और चांडिल-दलमा क्षेत्रों को प्रकृति प्रेमियों के लिए विकसित किया जा रहा है। नेतरहाट में 'इको-लॉज' और 'ट्री हाउस' का निर्माण किया जा रहा है।

  3. खनन पर्यटन (Mining Tourism): झारखंड भारत का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जो अपनी औद्योगिक विरासत को पर्यटन से जोड़ेगा। इसके तहत बंद पड़ी खदानों को सुरक्षित पर्यटन स्थलों और शैक्षिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

सांस्कृतिक और ग्रामीण पर्यटन पर जोर

झारखंड की असली पहचान इसकी आदिवासी संस्कृति और कला में निहित है। सरकार ने 'सरहुल' और 'करमा' जैसे त्योहारों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए विशेष उत्सवों का आयोजन शुरू किया है।

  • होमस्टे योजना: ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'होमस्टे' नीति लागू की गई है। इससे पर्यटक आदिवासी गांवों में रहकर उनकी जीवनशैली, सोहराय और कोहबर चित्रकला और स्थानीय व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

कनेक्टिविटी और सुरक्षा

पर्यटन स्थलों तक पहुँचने के लिए परिवहन व्यवस्था को सुधारा जा रहा है। केंद्र सरकार की 'पूर्वोदय' पहल के तहत झारखंड को 4,000 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं, जो प्रमुख पर्यटन केंद्रों को आपस में जोड़ेंगी। इसके अलावा, राज्य सरकार ने 'झारखंड पर्यटन क्षेत्र प्राधिकरण' (JTAA) का गठन किया है। यह प्राधिकरण उन पर्यटन स्थलों की स्वच्छता, सुरक्षा और पार्किंग का प्रबंधन करेगा जो नगर निकायों के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।

आर्थिक प्रभाव और भविष्य की राह

इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य झारखंड के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में पर्यटन की हिस्सेदारी बढ़ाना है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक पर्यटकों की संख्या को दोगुना करना और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक नौकरियां पैदा करना है। इसके लिए निवेशकों को 20-25% तक की सब्सिडी और टैक्स में छूट जैसे आकर्षक प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं।

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